Saturday, September 5, 2026

यहां घास काटने गई महिला को गुलदार ने बनाया शिकार, ग्रामीणों में आक्रोश

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भोंपूराम खबरी,पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष का एक और दर्दनाक मामला सामने आया है। जिले के पौड़ी ब्लॉक के बमठी गांव में गुरुवार सुबह एक 65 वर्षीय महिला की गुलदार के हमले में मौत हो गई। इस घटना ने न केवल गांव बल्कि पूरे क्षेत्र में दहशत और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, गांव निवासी सीता देवी सुबह अपने घर के पास जंगल किनारे घास काटने गई थीं। यह क्षेत्र ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की गतिविधियों का हिस्सा है, जहां महिलाएं और बुजुर्ग अक्सर चारा लेने जाते हैं। इसी दौरान घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमला इतना तेज था कि महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला और गुलदार उन्हें घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया।

घटना के वक्त आसपास कुछ ग्रामीण मौजूद थे, लेकिन जब तक वे कुछ समझ पाते और मदद के लिए दौड़ते, तब तक काफी देर हो चुकी थी। सूचना मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। हालांकि तब तक महिला की मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद पूरे गांव में भय का माहौल व्याप्त है और लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं।

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुमन ने इस मामले को लेकर सरकार और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की सक्रियता बनी हुई है और कई बार इसकी शिकायत भी की गई थी। बावजूद इसके, समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसका खामियाजा एक निर्दोष महिला को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

वहीं वन विभाग की ओर से घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीओ आशा बिष्ट ने बताया कि सूचना मिलते ही विभागीय टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। साथ ही, गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे भी लगाए जा रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द उसे काबू में किया जा सके।

हालांकि, ग्रामीण वन विभाग की इस कार्रवाई से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पहले भी इस तरह के हमले हो चुके हैं। लगातार बढ़ती घटनाओं से उनका जीवन असुरक्षित हो गया है। इसी कारण ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि जब तक आदमखोर गुलदार को मारने के आदेश जारी नहीं किए जाते, तब तक वे महिला के शव को मौके से उठाने नहीं देंगे।

गांव में फिलहाल तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रशासन और वन विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रही हैं। सुरक्षा के मद्देनज़र क्षेत्र में निगरानी भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी अन्य अनहोनी को रोका जा सके।

यह घटना एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते खतरे को उजागर करती है। जंगलों के सिमटते दायरे और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण जंगली जानवर अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए सरकार, वन विभाग और स्थानीय समुदाय को मिलकर काम करना होगा।

फिलहाल, बमठी गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग इस घटना से सहमे हुए हैं। सभी की निगाहें अब प्रशासन और वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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