भोंपूराम खबरी, देहरादूनI देशभर में मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने वर्ष 2026 की नीट-यूजी काउंसलिंग का बिगुल बजा दिया है। 5 अगस्त से राष्ट्रीय स्तर की काउंसलिंग शुरू हो चुकी है, जबकि 13 अगस्त से उत्तराखंड सहित राज्यों की काउंसलिंग प्रारंभ होगी। लेकिन इसी बीच उत्तराखंड के हजारों नीट अभ्यर्थियों के मन में एक बड़ा सवाल है—क्या इस वर्ष रुद्रपुर और पिथौरागढ़ राजकीय मेडिकल कॉलेजों में भी एमबीबीएस प्रवेश शुरू होंगे, या फिर एक और साल इंतजार करना पड़ेगा?
हैरानी की बात यह है कि रुद्रपुर और पिथौरागढ़ दोनों मेडिकल कॉलेजों का भवन और अधिकांश आधारभूत ढांचा लगभग तैयार है। इन परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये की सार्वजनिक धनराशि खर्च की जा चुकी है। इसके बावजूद केवल फैकल्टी की कमी के कारण इन मेडिकल कॉलेजों को आवश्यक मान्यता नहीं मिल सकी है।
यदि राज्य सरकार तत्काल फैकल्टी की नियुक्ति कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दे, तो उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 5 से बढ़कर 7 हो सकती है। इससे एमबीबीएस की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और उन हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, जो दो-दो और तीन-तीन वर्षों से नीट की कठिन तैयारी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने से केवल छात्रों को ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलेगी। भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और आम जनता को बेहतर एवं सुलभ उपचार मिल सकेगा।
अब जबकि राज्य काउंसलिंग शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं, सरकार के पास समय बहुत कम है। यदि त्वरित निर्णय लेकर फैकल्टी की व्यवस्था कर दी जाए, तो इसी शैक्षणिक सत्र में नए मेडिकल कॉलेजों से प्रवेश प्रक्रिया शुरू कराई जा सकती है। इससे प्रदेश के सैकड़ों विद्यार्थियों का सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बनने का सपना साकार हो सकता है।
बड़ा सवाल
जब भवन तैयार हैं, करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं और विद्यार्थी प्रवेश का इंतजार कर रहे हैं, तो आखिर केवल फैकल्टी की कमी के कारण उत्तराखंड के दो मेडिकल कॉलेज अब तक शुरू क्यों नहीं हो पाए? क्या सरकार समय रहते निर्णय लेकर प्रदेश के युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगी, या फिर एक और वर्ष यूं ही निकल जाएगा? यह बात डॉ गणेश उपाध्याय प्रवक्ता उत्तराखंड कांग्रेस ने कही।




