Saturday, September 5, 2026

पंतनगर और देहरादून एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग के निर्देश

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भोंपूराम खबरी। पंतनगर और देहरादून एयरपोर्ट में विमानों की नाइट लैंडिग की व्यवस्था के लिए जल्द कार्यवाही की जाए। दो नये शहरों को विकसित करने की कार्ययोजना को धरातल पर लाने के लिए तेजी से कार्यवाही की जाए। विरासत के साथ विकास के मॉडल पर कार्य किया जाए।

उत्तराखण्ड में वैडिंग डेस्टिनेशन विकसित किये जाने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा 04 सप्ताह में पॉलिसी बनाई जाए। पंतनगर और देहरादून एयरपोर्ट में विमानों की नाइट लैंडिग की व्यवस्था के लिए की जा रही कार्यवाही में तेजी लाई जाए। दो नये शहरों को विकसित करने की कार्ययोजना को धरातल पर लाने के लिए तेजी से कार्यवाही की जाए। गंगा और शारदा कॉरिडोर डेवलपमेंट और डाकपत्थर में बनने वाले नॉलेज सिटी के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किये जाएं। जून 2026 तक सभी परियोजनाओं पर विधिवत कार्य प्रारंभ किया जाए।बुधवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यू.आई.आई.डी.बी.) की तृतीय बैठक के दौरान ये निर्देश मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत के साथ विकास के मॉडल पर कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आगामी 25 साल की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विकास योजनाओं का सुनियोजित प्लान कर कार्य किये जाएं। 2047 तक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य में भी अल्पकालिक, लघुकालिक और दीर्घकालीन योजनाओं पर कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड के तहत सभी परियोजनाओं से संबधित क्षेत्रों के विकास के लिए सुनियोजित तरीके से कार्य किया जाए। जनप्रतिनिधियों और स्टेक होल्डरों के सुझावों को शामिल कर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश को वैडिंग डेस्टिनेशन के रूप में पहचान दिलाने के लिये विभिन्न स्थलों का चयन कर वहां अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर ध्यान देने को कहा। इसके लिए वेडिंग प्लानरों, होटल समूहों से सहयोग लेकर इसके प्रचार प्रसार पर भी ध्यान देने पर बल दिया। राज्यों में दो नये शहरों के विकास और सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना के तहत कार्य करने के उन्होंने निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यू.आई.आई.डी.बी. की परियोजनाओं के तहत पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। गंगा और शारदा कोरिडोर के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य हित में जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये यू.आई.आई.डी.बी. का गठन किया गया है, उसके परिणाम शीघ्र धरातल पर दिखाई दे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, विधायक श्री मदन कौशिक, श्रीमती रेनू बिष्ट, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर. के. सुधांशु, सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, श्री शैलेश बगोली, श्री दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्री विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर राजेश कुमार, उपाध्यक्ष एमडीडीए श्री बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी देहरादून श्री सविन बंसल, जिलाधिकारी पौड़ी डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी हरिद्वार श्री कर्मेन्द्र सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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