भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। सभी को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जिले में स्थिति ठीक नहीं है। मनरेगा के तहत जॉब कार्ड तो बना दिए गए, लेकिन लोगों को काम नहीं मिल रहा है। जिले में 1,01,636 मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं।
इनमें मात्र 408 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला है। जबकि 18,184 जॉब कार्डधारक परिवारों ने मनरेगा में काम मांगा है। जिले में 15,872 जॉब कार्डधारकों को काम दिया गया। जिले में 1.01.636 मनरेगा जॉब कार्डधारक है। प्रत्येक कार्डधारक को जन 100 दिन का रोजगार दिए जाने का प्रावधान है। बाजपुर में 14,593 मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें मात्र 52 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला है। जबकि 3,417 जॉब कार्डधारक परिवारों ने मनरेगा में काम मांगा है।
इनमें 3,145 जॉब कार्डधारकों को काम दिया गया। गदरपुर में 11,174 मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें मात्र 55 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला है। जबकि 2,350 जॉब कार्डधारक परिवारों ने काम मांगा है। इनमें 1,702 को काम दिया गया। जसपुर में 12,928 मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें मात्र 47 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला है। जबकि 2245 जॉब कार्डधारक परिवारों ने काम मांगा है, जिनमें 1916 को काम दिया गया। काशीपुर में 8,340 मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें मात्र 87 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला है। जबकि 1558 परिवारों ने काम मांगा है, जिनमें 1,337 को काम दिया गया। खटीमा में 21,960 मनरेगा जॉब कार्डधारक है जिनमें साम 92 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला है। जबकि 4,148 परिवारों ने मनरेगा में काम मांगा है, जिनमें 3712 को काम दिया गया। रुद्रपुर में 10,469 मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें मात्र 38 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला है जबकि 1752 परिवारों काम मांगा है, जिनमें 1,529 को काम दिया गया। सितारगंज में 22,172 मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें मात्र 42 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला है। जबकि 2,714 परिवारों ने काम मांगा है, जिनमें 2531 को काम दिया गया।
रुद्रपुर मनरेगा में काम नहीं मिलने के कारण लेबर अड्डे पर मजदूरों की भीड़ बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण मनरेगा में कम मजदूरी बताई जा रही है। मनरेगा के तहत काम करने पर उन्हें 237 रुपये दिए जा रहे हैं। जबकि दिहाड़ी मजदूरों को 400 से 500 रुपये मिलता है। इससे जॉब कार्डधारक मनरेगा के बजाय दिहाड़ी मजदूरी करने में रुचि | ले रहे हैं। मनरेगा के तहत सड़क निर्माण, नहरें बनाना, तालाब खुदाई का काम, कुएं | बनाना, भूमि विकास के काम, सूखा राहत, बाढ़ नियंत्रण जैसे कार्य किए जाते हैं। इन कार्यों में मजदूरों की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस योजना से जुड़े मजदूरों को इसमें कार्य दिया जाता है और उन्हें निर्धारित मजदूरी का भुगतान किया जाता है।
कई लोगों ने मनरेगा के तहत जॉब कार्ड GS से बनवा लिए हैं, लेकिन उन्होंने इस योजना के तहत काफी समय से काम की मांग नहीं की है। मनरेगा जॉब कार्ड का ब्लॉक स्तर पर सत्यापन कार्य शुरू किया जाएगा। इसमें काम नहीं मांगने वाले या बाहर रहकर मजदूरी करने वालों को चिह्नित किया जाएगा और ऐसे श्रमिकों के जॉब कार्ड को ब्लॉक कर दिया जाएगा। इसकी जगह दूसरे जरूरतमंद मजदूरों को जगह दी जाएगी। हिमांशु जोशी, परियोजना निदेशक डीआरडीए




