Friday, September 4, 2026

नौ जिलों में जमकर हुआ है भू-कानून का उल्लंघन, दर्ज होंगे मुकदमे

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भोंपूराम खबरी। भू-कानून के उल्लंघन से संबंधित रिपोर्ट शासन को मिल गई है। कुछ दिन पूर्व ही उत्तराखंड में शासन ने सभी जिलों से भू-कानून के उल्लंघन से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी। दरअसल, उत्तराखंड में बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा धड़ल्ले से जमीनों की खरीद-फरोख्त की जा रही है। राज्य के लोग लंबे समय से उत्तराखंड में सख्त भू-कानून की मांग उठा रहे हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर कुछ दिन पूर्व ही शासन ने राज्य के सभी जिलों के डीएम से राज्य गठन के बाद से अब तक की भूमि खरीद-फरोख्त की रिपोर्ट मांगी थी। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सोमवार को सचिवालय में समीक्षा बैठक की। मुख्य सचिव की ओर से सभी जिलाधिकारियों को सात अक्तूबर को पत्र जारी किया गया था। इसमें राज्य गठन से लेकर अभी तक जमीनों की खरीद-फरोख्त में भू-कानून के नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों का ब्योरा मांगा गया था। इसमें जिला और शासन स्तर से भूमि खरीद की ली गई अनुमति के विपरीत जाकर किए गए कार्यों का ब्योरा देना था। 11 जिलों से रिपोर्ट शासन को मिल गई है।

जेडएएलआर ऐक्ट में केस दर्ज होंगे

उत्तराखंड के नौ जिलों में भू-कानून का जमकर उल्लंघन हुआ है। बाहरी राज्यों के लोगों ने यहां पर बड़ी तादात में जमीनें खरीदकर उसका मानकों के तहत उपयोग नहीं किया है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा होने से हड़कंप मचा हुआ है। मुख्य सचिव ने कहा कि भूमि खरीद संबंधी अनुमति का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जेडएएलआर ऐक्ट के सेक्शन 166/167 के तहत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष प्रयोजन हेतु भू अनुमति प्राप्त कर, उस भूमि का उस विशेष उद्देश्य के लिए उपयोग न करने पर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी। 11 जिलों से रिपोर्ट मिल गई है।

नैनीताल और हरिद्वार की रिपोर्ट तलब

राज्य के नौ जिलों में भू-कानून के नियमों को ताक पर रखकर पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रुद्रप्रयाग और चंपावत जिलों में गड़बड़ियां प्रकाश में नहीं आई हैं। समीक्षा बैठक में सामने आया कि जिन 11 जिलों की रिपोर्ट मिली है, उनमें से नौ जिलों में भू-उपयोग का उल्लंघन हुआ हैं। कुछ प्रकरण में जिला स्तर पर केस दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की गई है। शेष प्रकरण, जिनमें भूमि का निर्धारित प्रयोजन हेतु भू-उपयोग नहीं किया गया है, उनके संबंध शासन से कार्रवाई को लेकर निर्देश मांगे गए हैं। हरिद्वार और नैनीताल जिले से रिपोर्ट अब तक शासन को नहीं भेजी गई हैं। दोनों जिलों के डीएम से शासन ने 24 घंटे के भीतरी रिपोर्ट मांगी है।

 

 

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