Saturday, September 5, 2026

अब उत्तराखंड में भी पंजाब की तरह बनाए जाएंगे साइलेज बंकर

Share

Advertisement

भोंपूराम खबरी,हल्द्वानी। पंजाब की तरह अब उत्तराखंड में भी पारंपरिक तरह से किसान पशुओं के लिए बंकर के अंदर साइलेज तैयार कर सकेंगे। भूमि के अंदर बने साइलेज बंकर में मक्के की फसल बारीकी से काटकर महीनों तक एयर टाइट कवर कर दी जाती है। उसके बाद बंकर से साइलेज निकालकर पशुओं को खिलाया जाता है।

उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन (यूसीडीएफ) की ओर से जायका (जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी) परियोजना के तहत प्रदेश के दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों के लिए निश्शुल्क साइलेज बंकर बनाए जा रहे हैं। एक बंकर बनाने के लिए 10 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। यह बंकर 1500 क्विंटल क्षमता का है। यूसीडीएफ के मुताबिक साइलेज बंकर के लिए जमीन के अंदर सीमेंटेड ब्लाक बनाए जाते हैं। जिसमें नींव की गहराई करीब 24 इंच और चौड़ाई 13.5 इंच होती है। इसमें मक्के की फसल को भर दिया जाता है। जिससे प्राकृतिक तरह से साइलेज (मक्के का अचार) बनता है। हालांकि वर्तमान में आंचल पशु आहार निर्माणशाला में मशीनों से पशुओं के लिए साइलेज ब्रिक्स तैयार की जा रही हैं। जिन्हें अनुदान स्वरूप पशुपालकों को वितरित किया जाता है। लेकिन अब साइलेज बनाने पारंपरिक प्रक्रिया को दोबारा अपनाया जा रहा है। मक्के की खेती करने वाले किसानों या पशुपालकों की भूमि पर ही साइलेज बंकर बनाए जाएंगे। यूसीडीएफ ने बंकर बनाने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। इच्छुक पशुपालकों से बंकर बनाने के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं।

क्या है साइलेज, कैसे होता है इसका उपयोग

साइलेज एक उच्च नमी वाला चारा है। जिसका उपयोग किसान अपने दुधारू पशुओं को खिलाने के लिए करता है। साइलेज की जैव रासायनिक प्रक्रिया कई चरणों में की जाती है। इसे पूरा होने में लगभग तीन सप्ताह लगते हैं। यह प्रक्रिया शुष्क पदार्थ के सेवन को बेहतर बनाने और अधिक सुपाच्य चारा बनाने के लिए किया जाता है। साइलेज फसलों के लगभग 85 प्रतिशत पोषण मूल्य को संरक्षित रखता है।

उत्तराखंड में साइलेज बंकर बनाने के लिए जायका प्रोजेक्ट के तहत फंड दिया गया है। पशुपालकों के लिए एक बंकर बनाने में करीब 10 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश के दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों की भूमि पर उनके लिए बंकर बनाए जाएंगे। ताकि भविष्य में चारे की कमी हो तो किसान उसका उपयोग आसानी से कर सकेंगे। जयदीप अरोड़ा, प्रबंध निदेशक, यूसीडीएफ

Advertisement
Advertisement

Read more

Local News

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.