Saturday, September 5, 2026

गिद्धों के संरक्षण पर बढें तीन कदम एक साथ

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भोंपूराम खबरी। बाघ संरक्षण के साथ-साथ वन विभाग गिद्ध संरक्षण के प्रति अब तेजी से कार्य करेगा जिसके लिए तराई पश्चिमी एवं रामनगर वन प्रभाग में जल्द गिद्धों की गणना की जाएगी।

रामनगर तराई पश्चिमी वन प्रभाग में वन्य प्राणी सप्ताह के शुभारंभ,के दौरान वनकर्मियों ने रविवार को गिद्ध संरक्षण के गुर सीखे।

यहां इको टूरिज्म सेंटर चूनाखान में आयोजित संयुक्त कार्यशाला में दर्द निवारक डाइक्लोफेनेक का दंश झेल रहे विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण पर गहरी चिंता व्यक्त की गई अब इससे निपटने के लिए कॉर्बेट फाउंडेशन ने तराई पश्चिमी एवं रामनगर वन प्रभाग के सहयोग से पहल की है। संस्था पहले दोनों वन प्रभागों में गिद्धों की मौजूदगी का डाटा जुटाएगी। रविवार को इको टूरिज्म सेंटर चूनाखान में दोनों वन प्रभागों संस्था के उपनिदेशक डॉ हरेंद्र बर्गली ने कहा कि इन्सानों द्वारा जाने-अनजाने में इस्तेमाल की गई दर्द निवारक डाइक्लोफेनेक दवा के कारण गिद्धों की 95 फीसदी आबादी काल कवलित हो गई। अस्सी के दशक तक 4 करोड़ गिद्ध पिछले 20 सालों में 50 हजार तक सिमट कर रह गए हैं। तीन जिन प्रजातियों पर इसका सबसे घातक प्रभाव पड़ा है। पर्यावरण संरक्षण में गिद्ध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इन्हें बचाने के प्रयास किए जाने चाहिए।के वनकर्मियों को गिद्ध संरक्षण के गुर सिखाए गए।

प्रोजेक्ट ऑफिसर दीप्ति पटवाल एवं नेहा रैक्वाल ने कहा कि हमें लोगों को जागरूक करना होगा कि वे मवेशियों के लिए डाइक्लोफेनेक की जगह मेलॉक्सिकैम का इस्तेमाल करें। एसडीओ प्रदीप कुमार धौलाखंडी ने कहा कि वनकर्मियों को जंगल में मृत पड़े या फेंके गए मवेशियों की नियमित रूप से निगरानी करनी होगी। कार्यशाला में गिद्धों की विलुप्ति के सभी कारणों पर चर्चा करते हुए कारगर उपाय तलाशे गए। इस दौरान गिद्धों की पहचान एवं गणना के गुर भी सिखाए गए। दोनों वन प्रभागों के वनकर्मी सोमवार को सभी संभावित स्थानों में गिद्धों की गणना करेंगे। कार्यशाला में प्रशिक्षु एसडीओ आयशा बिष्ट, रेंजर ललित जोशी, ख्याली राम, लक्ष्मण सिंह मर्तोलिया, जेपी डिमरी, ललित कुमार, कृपाल बिष्ट, मुकेश जोशी, आरसी ध्यानी समेत डिप्टी रेंजर, वन दरोगा व वन रक्षक शामिल थे।

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