Saturday, September 5, 2026

सावन में घर बैठे कर सकते हैं भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, महाकाल और सोमनाथ मंदिर के आरती का लें आनंद

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भोंपूराम खबरी। सावन की धूम पूरे देश के कोने-कोने में देखने को मिल रही है। हर तरफ लोग भगवान शिव की भक्ती में डूबे हुए हैं। आज सावन का चौथा सोमवार है, जिसमें हर एक मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है।

12 ज्योतिर्लिंगों की मान्यता अधिक

यूं तो देश में महादेव के कई छोटे- बड़े मंदिर हैं, लेकिन इनके 12 ज्योतिर्लिंगों की मान्यता सबसे अधिक होती है। सावन के महीने में इन ज्योतिर्लिंगों में भक्तों की भीड़ का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। इस साल सावन का अधिक मास चल रहा है, इसमें भगवान के ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करना बेहद ही शुभ माना जाता है।

हर एक भक्त की श्रद्धा होती है कि वो सावन के इस पावन महीने में भगवान शिव के इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकें और उनकी आरती में शामिल हो सकें। हालांकि, ऐसा कर पाना सबके लिए संभव नहीं हो पाता है। अगर आप स्वयं यहां नहीं जा पा रहे हैं, तो घर बैठे इनके लाइव दर्शन कर सकते हैं।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग

पृथ्वी पर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में विद्यमान हैं, इस वजह से इन 12 मंदिरों को ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। इन बारह ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, विश्वेश्वर (काशी विश्वनाथ), त्र्यंबकेश्वर, बैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर, घुश्मेश्वर (घृष्णेश्वर) शामिल हैं।

देवघर का बैद्यनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में एक है। इस ज्योतिर्लिंग की खासियत यह है कि इसमें शिव और शक्ति एक साथ विराजमान हैं। लोगों की मान्यता है कि जब माता सती का हृदय इसी स्थान पर आकर गिरा था। इसलिए इस मंदिर को हृदय पीठ और शक्तिपीठ भी कहा जाता है। कांवड़ का जल चढ़ाने के लिए यहां हर साल सावन में भक्तों का हुजूम देखने को मिलता है।उत्तर प्रदेश के काशी में स्थित है। भगवान शिव और काल भैरव का यह मंदिर साल के 365 दिन भक्तों से भरा रहता है। माना जाता है कि जब माता पार्वती ने भगवान शिव से उनके घर जाने को कहा, तो भगवान शिव उन्हें काशी लेकर आए थे। यह स्थान शिव और पार्वती का आदि स्थान है, इसलिए आदिलिंहग के रूप में आविमुक्तेश्वन को ही प्रथम लिंग माना गया  है।

उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि दक्षिणामुखी मृत्युंजय भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होकर सृष्टि का संचार करते हैं। इसे अवंती, अवंतिका, उज्जयिनी, विशाला, नंदिनी, अमरावती, पद्मावती, प्रतिकल्पा, कुशस्थली जैसे नामों से जाना जाता है।

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