Saturday, September 5, 2026

हाईकोर्ट: 13 साल की बच्ची के गर्भपात का आदेश

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भोंपूराम खबरी। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नाबालिग किशोरी के गर्भपात के लिए मैडिकल बोर्ड टीम बनाने के निर्देशों के साथ अनुमति दे दी है। एकलपीठ ने मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर को तय की है। वरिष्ठ न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा की एकलपीठ ने 6 दिसंबर को एक आदेश पारित कर 13 वर्षीय गर्भवती किशोरी के गर्भपात की सशर्त अनुमति दे दी है। मामले के अनुसार उच्च न्यायालय में एक 13 वर्षीय किशोरी के पिता व अन्य ने याचिका दायर कर यौन उत्पीड़न से गर्भावस्था की स्थिति के समाधान के लिए देहरादून के सी.एम.ओ.और दून चिकित्सा अस्पताल को निर्देश देने की प्रार्थना की थी।

न्यायालय के सामने पिता और पीड़ित पुत्री वर्चुअली उपस्थित हुए। बताया गया कि किशोरी के 25 सप्ताह का गर्भ है। न्यायालय ने एक्सपर्ट डॉक्टरों का एक पैनल बनाकर गर्भपात की अनुमति दे दी है। खंडपीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐसे कुछ मामलों में अनुमति दिए जाने के बाद इस याचिका में भी अनुमति दे दी। न्यायालय ने अधिकारियों को एक मैडिकल बोर्ड का गठन कर सवेधनशीलता के साथ कार्य को करने को कहा है। न्यायालय ने देहरादून अस्पताल की प्रमुख, डॉक्टर चित्रा जोशी से किसी क्रिटिकल स्थिति में अपने विवेक से काम लेने को भी कहा है। न्यायालय ने 1971 के मैडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट का हवाला देते हुए गर्भपात के लिए दी गई समय सीमा पर भी गौर करते हुए यह निर्णय लिया। न्यायालय ने मैडिकल बोर्ड से ये भी कहा कि, किशोरी के पिता से लिखित में कंसेंट ले लिए जाएं और उसमें न्यायालय में वर्चुअली दिए गए कंसेंट का भी जिक्र कर दिया जाए। मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होनी तय हुई है।

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