भोंपूराम खबरी। गुजरात में ब्रिटिश काल में स्थापित मोरबी पूल टूटने के चलते जहां एक ओर भयानक हादसा हो गया वहीं डेढ़ सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई है, ये घटना भले ही गुजरात में घटी हो लेकिन इस घटना से उत्तराखंड प्रशासन अलर्ट मोट आ गया है। जिसके चलते सूबे के पुलिस मुखिया डीजीपी अशोक कुमार ने समस्त जिला प्रभारियों को निर्देशित किया है। कि पुलों से संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट सही होने के बाद ही इन पुलों पर आवाजाही होने दी जाए। साथ ही कहा है की जिन पुलों को बंद किया गया है उन पर अगर किसी भी तरह की आवाजाही हुई तो संबंधित क्षेत्र प्रभारी पर कार्यवाही की जाएगी।

इसी क्रम में न्यूज़ इंडिया अपडेट के जागरूक दर्शक व् साथ ही सूकी भल्लागाँव के जागरूक जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान लक्ष्मण बुटोला ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पहाड़ों के दूरस्थ इलाकों में स्थापित किए गए झूला पुलों की जानकारी हम से सांझा की है। जोशीमठ ब्लॉक में जर्जर पुलों की बात की जाए तो लिस्ट बेहद लम्बी है इस रिपोर्ट में आपको सिर्फ दो झूला पुलों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, पहला झूला पुल है, फागति पैदल पुल जिसका निर्माण आज से 40 साल पहले हुआ था उसके बाद से लेकर आज तक इस पैदल पुल पर कभी भी व् किसी भी प्रकार की मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है।
आज इसके हालात यह है कि हर नट बोल्ट पर जंक लगा हुआ है, इसकी हालत देखकर ग्रामीण इस पूल पर जाने से डरते है परंतु कोई और वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के चलते इसी से गुजारा करना पड़ता है और जान को जोखिम में डालकर सफर करना होता है। इन पुलों की मरम्मत हेतु प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं। परंतु आज तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया बड़ा सवाल है कि क्या गुजरात के भांति शासन-प्रशासन यहां भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? ग्राम प्रधान लक्ष्मण बुटोला बताते हैं की सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि घोड़े खच्चर गाय भैंस इत्यादि जानवरों को भी इन्ही पुलों से लाया ले जाया जाता है जिससे इन पुलों पर खतरा अधिक बना हुआ है,ऐसा ही एक अन्य पुल जुव्वा जोग्जू पैदल पुल भी है जोकि खस्ताहाल व्यवस्था का शिकार हो रहा है, सरकार को जल्द से जल्द इन पुलों की जांच करनी चाहिए ताकि समय रहते किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके। इस रिपोर्ट में आपने देखा की क्या हालात है पहाड़ के दूरस्थ इलाकों में बने हुए झूला पुलों की मगर बावजूद इसके जिला प्रभारी अपनी रिपोर्ट में सब कुछ चंगा है मगर जरूरत है शासन प्रशासन को इन पुलों की सटीक जानकारी देने की ताकी भविष्य में गुजरात जैसा हादसा उत्तराखंड में ना हो सके, जरुरत से ज्यादा आवाजाही इन पुलों पर अभी नहीं है, लेकिन फिर भी हर जान कीमती होती है इसलिए प्रशासन को जरूरत है जल्द से जल्द इन पूलों के संज्ञान लेने की। और डर के माहौल में रह रहे ग्रामीणों को भय मुक्त करने की।




