Monday, November 2, 2026

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें? जानें मुहूर्त, मंत्र, भोग और आरती

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भोंपूराम खबरी। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा को मां कूष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। कहते हैं कि अपनी मंद यानी हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण मां दुर्गा को ‘कूष्मांडा’ नाम से पुकारा जाता है। कहा जाता है कि जब सृष्टि नहीं थी, चारों ओर अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें सृष्टि की ‘आदिशक्ति’ या ‘आदिस्वरूपा’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करने से समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु और यश में वृद्धि होती है। सुख-समृद्धि के साथ सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।

देवी कूष्मांडा मां भवानी का चौथा स्वरूप हैं। इनका स्वरूप अत्यंत दिव्य, तेजस्वी और प्रकाशमान है। मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा है। मां कूष्मांडा के आठवें हाथ में सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। माता का वाहन सिंह या शेर है। जानें मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, रंग, फूल और आरती।

मां कूष्मांडा पूजा विधि:

मां कूष्मांडा की पूजा करने के लिए सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए मां दुर्गा को फल, फूल, सुहाग का सामान, धूप, दीपक और मिठाई आदि अर्पित करें। अंत में मां कूष्मांडा को भोग लगाएं और आरती उतारें।

मां कूष्मांडा की पूजा ये शुभ मुहूर्त:

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:54 से सुबह 05:43 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:30 बजे तक।

अमृत काल: दोपहर 04:14 से शाम 05:57 बजे तक।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 से दोपहर 03:09 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:17 से शाम 06:42 बजे तक।

मां कूष्मांडा का प्रिय भोग:

मां कूष्मांडा को नवरात्रि के चौथे दिन मालपुआ का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा माता को कद्दू से बनी मिठाई या पेठा और दही आदि भी अर्पित किए जाते हैं।

नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग:

नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग हरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करने से मां कूष्मांडा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नवरात्रि के चौथे दिन का प्रिय फूल:

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा का प्रिय रंग लाल है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा में लाल कमल, लाल गुड़हल और लाल गुलाब आदि शामिल करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां कूष्मांडा की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

मां कूष्मांडा के प्रिय मंत्र:

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा के प्रिय मंत्रों का जाप करने से साधक को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। ये हैं मां के प्रिय मंत्र:

मां कूष्मांडा का मंत्र (मंत्र):

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

मां कूष्मांडा का बीज मंत्र:

ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः

मां कूष्मांडा का स्तुति मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कूष्मांडा की आरती:

कुष्मांडा जय जग सुखदानी।

 

मुझ पर दया करो महारानी॥

 

पिगंला ज्वालामुखी निराली।

 

शाकंबरी मां भोली भाली॥

 

लाखों नाम निराले तेरे ।

 

भक्त कई मतवाले तेरे॥

 

भीमा पर्वत पर है डेरा।

 

स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

 

सबकी सुनती हो जगदंबे।

 

सुख पहुंचती हो मां अंबे॥

 

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।

 

पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

 

मां के मन में ममता भारी।

 

क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

 

तेरे दर पर किया है डेरा।

 

दूर करो मां संकट मेरा॥

 

मेरे कारज पूरे कर दो।

 

मेरे तुम भंडारे भर दो॥

 

तेरा दास तुझे ही ध्याए।

 

भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

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