भोंपूराम खबरी,काशीपुर। शांत प्रदेश माने जाने वाले उत्तराखंड की जेलों में बंद कैदियों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य की आधे से अधिक जेलों में उनकी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक कैदी बंद हैं। कई जेलों में तो स्थिति ऐसी है कि वहां क्षमता से दोगुने तक कैदी रखे गए हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में प्रदेश की जेलों में बंद कुल कैदियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।
RTI के अनुसार सबसे ज्यादा दबाव जिला कारागार नैनीताल पर है। यहां 71 कैदियों की क्षमता के मुकाबले 141 कैदी बंद हैं, यानी जेल लगभग दोगुनी क्षमता पर चल रही है।
वहीं जिला कारागार अल्मोड़ा में 102 क्षमता के मुकाबले 189 कैदी बंद हैं, जो क्षमता का करीब 185 प्रतिशत है।
देहरादून और हल्द्वानी जेलों की स्थिति भी गंभीर
राजधानी की देहरादून जेल भी भारी दबाव में चल रही है। यहां 580 कैदियों की क्षमता के मुकाबले 911 कैदी बंद हैं।
इसी तरह उपकारागार हल्द्वानी में 675 क्षमता के मुकाबले 1025 कैदी बंद हैं।
उत्तराखंड की सबसे अधिक ओवरलोड जेलें
जेल क्षमता बंद कैदी
जिला कारागार नैनीताल क्षमता 71 , बंद कैदी 141
जिला कारागार अल्मोड़ा क्षमता 102 बंद कैदी 189
जिला कारागार देहरादून क्षमता 580 बंद कैदी 911
उपकारागार हल्द्वानी क्षमता 675 बंद कैदी1025
केंद्रीय कारागार क्षमता सितारगंज 552 बंद कैदी 772
उपकारागार रुड़की क्षमता 244 बंद कैदी 298

सूचना के अनुसार सबसे कम कैदी सम्पूर्णानंद शिविर (खुली जेल) सितारगंज में बंद हैं। यहां 300 क्षमता के मुकाबले केवल 56 कैदी मौजूद हैं।
इसके अलावा जिला कारागार चमोली और पौड़ी में भी क्षमता से कम बंदी दर्ज किए गए हैं।
RTI में सामने आया कि वर्ष 2025 में उत्तराखंड की जेलों में कुल 5521 कैदी बंद थे, जबकि 2026 में यह संख्या घटकर 4812 रह गई है। यानी एक वर्ष में 765 कैदियों की कमी आई है।
हालांकि कैदियों की संख्या घटने के बावजूद कई जेलों में ओवरक्राउडिंग की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने से सुरक्षा, स्वास्थ्य और व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ता है। इससे कैदियों के पुनर्वास और सुधार संबंधी योजनाओं पर भी असर पड़ता है।
उत्तराखंड की जेलों में लगातार बढ़ रही भीड़ अब कारागार प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।




