Saturday, September 5, 2026

अब दरोगा नहीं बनेंगे कोतवाली इंचार्ज, इंस्पेक्टर ही करने होंगे तैनात, पीएचक्यू ने जारी किए आदेश

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भोंपूराम खबरी। सब इंस्पेक्टर श्रेणी के पुलिस अफसर अब कोतवाली प्रभारी नहीं बनाए जाएंगे। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में किसान सुखवंत की आत्महत्या के बाद राज्य की पुलिसिंग पर सवाल उठने पर पीएचक्यू ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि जिन थानों को कोतवाली का दर्जा दिया गया है, वहां अब दरोगा इंचार्ज नहीं रहेंगे। बल्कि, अनुभवी इंस्पेक्टर (कोतवाल) की ही तैनाती होगी। बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने पिछले साल ही राज्य के 58 थानों का उच्चीकरण कर उन्हें कोतवाली बनाया था। इस लिस्ट में ऊधमसिंह नगर का आईटीआई थाना भी शामिल था। उच्चीकरण के बाद यहां कमान इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के पास होनी चाहिए थी। चार्ज एक काफी जूनियर दरोगा कुंदन सिंह रौतेला को दे दिया गया था। आरोप है कि थानाध्यक्ष की लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली के चलते क्षेत्र के किसान सुखवंत सिंह को प्रताड़ित होना पड़ा। जिससे तंग आकर उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस प्रकरण से पुलिस की खूब किरकिरी हो रही है।

 

निरीक्षकों को नहीं मिल रहा चार्ज

उत्तराखंड के लगभग हर जिले के तमाम कोतवाली में मौजूदा वक्त में सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी को ईचार्ज बनाया गया है। नैनीताल, अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार जिले में इनकी सर्वाधिक तादात है। कहा जाता है कि उच्चाधिकारियों और राजनेताओं में अच्छी पकड़ रखने वाले सब इंस्पेक्टर आसानी से कोतवाली प्रभारी बन जाते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। अब इंस्पेक्टर रैंक के अनुभवी अधिकारी को ही कोतवाली का प्रभार सौंपा जाएगा।

 

राज्य में हैं 112 कोतवाली

बीते वर्ष राज्य में उप निरीक्षक (दरोगा) स्तर के 58 थानों को अपग्रेड कर कोतवाली बनाया गया था। इसके साथ ही अब राज्य में इंस्पेक्टर स्तर के कोतवालियों की संख्या बढ़कर 112 हो गई है। कुल थानों और कोतवालियों की संख्या 166 है। इससे पहले तक प्रदेश में इंस्पेक्टर स्तर के मात्र 54 थाने ही थे। लेकिन अब भी अधिकांश कोतवाली में सब इंस्पेक्टर रैंक के ही अधिकारियों को प्रभारी बनाया गया है।

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