
भोंपूराम खबरी,काशीपुर। अलीगंज रोड क्षेत्र के ग्राम पैगा से जुड़े एक दर्दनाक घटनाक्रम ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। हल्द्वानी के गौलापार स्थित एक होटल में ठहरे काशीपुर

निवासी किसान सुखवंत सिंह ने कथित प्रॉपर्टी फ्रॉड से मानसिक रूप से टूटकर खुद को गोली मार ली। यह घटना केवल एक आत्महत्या तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके साथ ही उनके पूरे परिवार का जीवन संकट में आ गया। जिस कमरे में यह भयावह घटना हुई, वहां उनकी पत्नी परदीप कौर और बेटा गुरसेज सिंह भी मौजूद थे, जिन्हें गोली के छर्रे लगने से गंभीर चोटें आईं। बताया गया कि शनिवार देर रात करीब ढाई बजे सुखवंत सिंह ने अपनी कनपटी पर गोली चला दी, जिससे मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। होटल में अचानक मची अफरा-तफरी के बीच घायल पत्नी और बेटे को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। यह घटना सामने आते ही क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया, क्योंकि मृतक के परिजन इसे केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश और सिस्टम की विफलता का परिणाम बता रहे हैं
हल्द्वानी के काठगोदाम थाना क्षेत्र में हुई इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया। थानाध्यक्ष विमल मिश्रा ने बताया कि घायल परदीप कौर और गुरसेज सिंह को तुरंत सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों का इलाज चल रहा है। वहीं, मृतक सुखवंत सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में घटना के पीछे प्रॉपर्टी से जुड़ा विवाद सामने आया है। परिवार के अनुसार सुखवंत सिंह से करोड़ों रुपये लेकर गलत तरीके से जमीन का बैनामा किया गया था, जिससे वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन परिजन और किसान संगठनों का कहना है कि यह केवल स्थानीय जांच का विषय नहीं, बल्कि इसमें बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में जमीन घोटालों और किसानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जैसे ही सुखवंत सिंह का पार्थिव शरीर काशीपुर स्थित उनके घर पहुंचा, पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। घर पर परिजनों के आंसुओं के साथ-साथ गुस्से और आक्रोश की भावनाएं भी साफ दिखाई दीं। उत्तराखंड (युवा) भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र जीतू सहित बड़ी संख्या में किसान नेता और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। मीडिया से बातचीत के दौरान जितेंद्र सिंह जितेंद्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुखवंत सिंह की यह शहादत बेकार नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो रसूखदार हैं और जिनकी पहुंच ऊंचे अधिकारियों तक है। उनका कहना था कि चाहे कोई भी कितना बड़ा अधिकारी क्यों न हो, यदि वह दोषी पाया जाता है तो उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधे तौर पर मांग की कि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
परिवार के सदस्यों की पीड़ा शब्दों में बयान करना मुश्किल
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था। मृतक के पुत्र ने भी मीडिया के सामने भावुक लेकिन दृढ़
स्वर में कहा कि उनके पिता मरने से पहले जो चाहते थे, वही अब उनकी आखिरी इच्छा है। बेटे ने साफ कहा कि इस पूरे मामले में जिन अधिकारियों या अन्य लोगों की भूमिका सामने आए, उन सभी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उसने यह भी कहा कि उनके पिता ने मरने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाला था, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुए अन्याय का जिक्र किया था। परिवार की मांग है कि उस वीडियो को पुख्ता सबूत मानते हुए सभी संबंधित लोगों पर मुकदमा दर्ज किया जाए। परिजनों का कहना है कि यह केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे किसान समाज के सम्मान और अधिकारों का सवाल है, जिसे अब किसी भी कीमत पर दबने नहीं दिया जाएगा।
घटना के बाद किसान संगठनों ने इसे किसान की आहुति और सिस्टम से हार मानने की मजबूरी करार दिया। किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि सुखवंत सिंह वर्षों से अपनी जमीन और पैसों के लिए लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन हर स्तर पर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बताया गया कि करोड़ों रुपये लेकर गलत जमीन का बैनामा किया गया, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि मानसिक यातना भी झेलनी पड़ी। नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते प्रशासन ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया होता, तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता । किसान यूनियन ने साफ कहा कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। इसी के तहत तीन प्रमुख मांगें सामने रखी गई हैं, जिनमें वीडियो को साक्ष्य मानकर मुकदमा दर्ज करना, सीबीआई जांच कराना और ठगी गई पूरी रकम की वापसी सुनिश्चित करना शामिल है।
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने काशीपुर निवासी किसान द्वारा हल्द्वानी आत्महत्या किए जाने के इस गंभीर प्रकरण को अत्यंत संवेदनशीलता से लेते हुए कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत को मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस दुखद घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर यदि लापरवाही या दोष सामने आता है, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस मामले को हल्के में न लेने का संकेत देते हुए प्रशासन को पूरी गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ से भी पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जाए और किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। मुख्यमंत्री ने दिवंगत किसान सुखवंत सिंह के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि सरकार इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि घायल पत्नी परदीप कौर और बेटे गुरसेज सिंह को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और परिवार को हर संभव सहायता दी जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में किसानों की स्थिति, जमीन विवादों और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और किसान संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामलों में किसानों का सिस्टम से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। सुखवंत सिंह की मौत को किसान समाज एक चेतावनी के रूप में देख रहा है, जो यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण किसान बड़े-बड़े प्रॉपर्टी फ्रॉड और ताकतवर लोगों के बीच पिस जाता है। अब सबकी नजरें सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में सचमुच निष्पक्ष कार्रवाई होगी या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। परिवार, किसान संगठन और आम जनता यही उम्मीद कर रही है कि सुखवंत सिंह की कुर्बानी से एक नई लकीर खिंचेगी और उन्हें वह न्याय मिलेगा, जिसकी मांग उन्होंने आखिरी सांस तक की थी।


