
भोंपूराम खबरी। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो की पिछले 4 दिनों में 1200 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल होने के बाद केंद्र सरकार शुक्रवार को बैकफुट पर आ गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयलाइंस, खासकर इंडिगो को 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी राहत दी है। वीकली रेस्ट के बदले कोई भी छुट्टी नहीं देने के फैसले को वापस ले लिया।

इंडिगो का दावा है कि इस नियम की वजह से पायलटों और अन्य स्टाफ की कमी हुई थी और पूरा ऑपरेशन प्रभावित हुआ। इसे दुरुस्त करने समय लगेगा। DGCA ने 1 नवंबर से पायलटों और अन्य क्रू मेंबर्स के काम से जुड़े नियम, फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) का दूसरा फेज लागू किया था। पहला चरण 1 जुलाई को लागू हुआ था।
FDTL के दूसरे फेज के नियमों में, एयरलाइन कंपनियों के लिए पायलटों को हफ्ते में 48 घंटे आराम, यानी दो दिनों का वीकली रेस्ट देना अनिवार्य कर दिया था। इस दौरान किसी छुट्टी को वीकली रेस्ट गिनने पर रोक लगा दी थी। DGCA ने पायलटों और अन्य क्रू मेंबर्स के लगातार नाइट शिफ्ट पर भी पाबंदी लगाई थी।
नए नियमों में वीकली रेस्ट और छुट्टियों को अलग-अलग मानने का प्रावधान था। यह नियम पायलटों और अन्य क्रू के थकान को कम करने के लिए बनाया गया था। हालांकि, अब क्रू को पहले की तरह हर हफ्ते में लगातार 36 घंटे का आराम मिलेगा।
इस पूरे विवाद को पायलट अमित के उदाहरण से समझिए
मान लीजिए पायलट अमित ने सोमवार से गुरुवार तक 4 दिन काम किया। फिर उसने 2 दिन की छुट्टी (शुक्रवार और शनिवार) मांगी और अप्रूव हो गई।
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एक नवंबर से बदले नियम के अनुसार (छुट्टी और साप्ताहिक आराम अलग-अलग ): अमित की छुट्टी पूरी हो गई, लेकिन उसका वीकली रेस्ट अलग से पूरा करना जरूरी है। मतलब- शनिवार की छुट्टी खत्म होने के बाद भी, उसके पास 48 घंटे का वीकली रेस्ट बाकी है। इसलिए अमित को रविवार और सोमवार तक फ्लाइट्स ऑपरेशन में नहीं लगाया जा सकता।
एक नंवबर के पहले के नियम के अनुसार (छुट्टी और साप्ताहिक आराम जोड़ सकते हैं): एयरलाइन अमित की 2 दिन की छुट्टी को उसके साप्ताहिक आराम में जोड़ सकती है। मतलब- शनिवार की छुट्टी खत्म होने के बाद भी वह रविवार से काम कर सकता है।
DGCA के नए नियम, जिससे इंडिगो में स्टाफ क्राइसिस हुई

DGCA के अस्थायी आदेश का असर
DGCA ने एयलाइंस, खासकर इंडिगो को 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी राहत दी है।
रात की ड्यूटी में छूट: पहले की तरह रात में 6 उड़ानें भर सकेंगे।
साप्ताहिक आराम के नियम में ढील: साप्ताहिक आराम और छुट्टी को जोड़ा जा सकता है।
फायदा: पायलट अधिक उपलब्ध होंगे। उड़ानों में व्यवधान कम आएगा। फ्लाइटस ऑपरेशन सामान्य हो जाएगा।
• डर: इससे पायलट्स और क्रू मेंबर को आराम नहीं मिलेगा। DGCA का मकसद था कि एविशन सेक्टर में होने वाले संभावित जोखिम को टाला जा सके।
आगे क्या होगा: हर 15 दिन में समीक्षा होगी। अब सरप्राइज ऑडिट्स और रोस्टर पर निगरानी रखनी होगी। इंडिगो को बड़ी संख्या में A320 पायलटों की हायरिंग करनी पड़ेगी। यदि सुरक्षा से समझौता दिखा तो आशिंक छूट तुरंत वापस ली जा सकती है।
एविएशन एक्सपर्ट अनंत सेठी कहते हैं कि इंडिगो ने एक सोची समझी हड़ताल की है। नए नियमों को अचानक लागू नहीं किया गया था। स्टाफ की कमी पूरी करने के लिए इंडिगो के पास पर्याप्त समय था, लेकिन इंडिगो के पास भारतीय एविएशन सेक्टर में करीब 65% की हिस्सेदारी है। उसने अपना खर्च कम करने के लिए नए स्टाफ की भर्ती नहीं की और दबाव बनाने के लिए फ्लाइट्स प्रभावित की गईं।
DGCA नए रोस्टर नियम क्यों लाया
मकसद- ऑपरेशनल दक्षता और सुरक्षा दोनों बेहतर हों। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार फ्लाइट्स ऑपरेशन चले।
• लगातार उड़ान भरने से पायलट थक जाते थे। थके पायलट्स से गलतियां होने का जोखिम बढ़ जाता था।
दुनिया के कई देशों में सख्त नियम हैं। भारत को भी इन्हें अपनाने की जरूरत है।
ड्यूटी के बीच आराम का समय बढ़ाया गया ताकि उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बना रहे।
इंडिगो के पास सबसे ज्यादा प्लेन, इसलिए ज्यादा असर हो रहा
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एयरलाइन दिन भर में लगभग 2,300 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेट करती है। यह संख्या एअर इंडिया के एक दिन में संचालित उड़ानों की लगभग दोगुनी है।
इतने बड़े पैमाने पर यदि 10-20 प्रतिशत उड़ानें भी देर से चलें या रद्द हों, तो इसका मतलब होता है 200-400 उड़ानें प्रभावित होना। हजारों यात्रियों के लिए बड़ी मुश्किलें आना । बुधवार को भी इंडिगो की 200 से ज्यादा उड़ानों पर असर पड़ा था।
DGCA के अनुसार, क्रू की कमी इसकी मुख्य वजह है। इंडिगो में यह दिक्कत पिछले महीने से चल रही है। नवंबर में इसकी 1232 उड़ानें रद्द हुईं। मंगलवार को 1400 उड़ानें देरी से चलीं।



