भोंपूराम खबरी, रूद्रपुर। नगर की प्राचीन व सुप्रसि़द्ध मुख्य रामलीला की सातवीं रात्रि की श्रीरामलीला मंचन में राम लक्ष्मण का सीता जी को पंचवटी में न पाकर व्याकुल हो जाना, सीता जी की खोज करना, राम की जटायु से भेंट, जटायु की मृत्यु, षबरी के बेर, प्रभु श्रीराम एवं उनके अनादि भक्त हनुमान का महामिलन, राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध एवं हनुमान जी का माता सीता जी की खोज में रवाना किये जाने तक की बहुत ही सुन्दर लीला का मंचन हुआ।
इससे पूर्व श्री रामलीला का उद्घाटन मुख्य अतिथि रमेश कान्ता एवं श्रीराम बाजार सिडकुल के व्यवसायियों एवं समाजसेवियों हरीश अरोरा, विपिन त्यागी, एसके सक्सेना, उमेश शर्मा, सुशांत चौहान, हरविन्दर सिंह व अंकित बाबा नें प्रभु श्रीराम के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया। इस दौरान श्री रामलीला कमेटी ने अतिथियों का माल्यार्पण कर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया।
सोमवार रात की लीला में सर्वप्रथम राम व लक्ष्मण पंचवटी वापस आते है तो वहां सीता को न पा व्याकुल हो जाते है। राम-लखन सीताजी को खोजते-खोजते आगे बढ़ते हैं तो उन्हें घायल जटायु मिलता है, जो यह बताता है कि सीता को रावण हर ले गया है। जटायु के बताये दक्षिण दिशा की ओर बढ़ते हुये राम-लखन की मुलाकात माता शबरी से होती है। शबरी रामभक्ति में लीन होकर प्रभु को बेर खिलाती है। आगे बढ़ते हुये राम-लखन किश्किन्धा पहुंचते हैं, जहां राजा सुग्रीव की आज्ञा से हनुमान उनका भेद जाननें ब्राहमण का भेद बनाकर आते है। हनुमान अपने बुद्धि कौशल का इस्तेमाल करते हुये अनेंकों सवाल पूछते है। जब उन्हें यह पता लगता है कि यह दोनो सन्यासी युवक राम-लक्ष्मण हैं, तो हनुमान भावुक हो जाते है। वह राम के चरणों में गिर जाते है और अपना असली रूप दिखाते है। हनुमान राम-लक्ष्मण को अपनें कंधों पर बैठाकर सुग्रीव के पास ले जातें है। राम व सुग्रीव परस्पर मित्रता की संधि करते है। सुग्रीव बाली के दरबार पहुंचकर उसे ललकारता है । इस बार राम बाली का वध कर देंतें है। सुग्रीव को किश्किन्धा का राजपाट वापस मिल जाती है। सुग्रीव अब सीता की खोज के लिये चारों दिशाओं में अपनी वानर सेना को भेजता है। सबसे महत्तवपूर्ण दक्षिण दिशा में राजकुमार अंगद एवं हनुमान को भेजा जाता है।
आज राम की भूमिका में मनोज अरोरा, लक्ष्मण की भूमिका में राजकुमार कक्कड़, हनुमान की भूमिका में सुषील गाबा, जटायु की भूमिका में गोला ईदरीसी, सुग्रीव की भूमिका में पवन गाबा पल्ली, बाली की भूमिका में विषाल अनेजा, शबरी की भूमिका में नरेश छाबड़ा, गणेष भगवान की भूमिका में आशीष ग्रोवर, तारा की भूमिका में सुमित आनन्द, जामवन्त की भूमिका में रोहित खुराना ,छोटे राम की भूमिका में मुंजाल, नल की भूमिका में मोहन अरोरा, नील की भूमिका में हर्शित, छोटा अंगद छोटा हनुमान आयुश्मान सुषील गाबा ने बहुत ही सुन्दर अभिनय कर उपस्थित हजारो जनता का मन मोह लिया। श्रीरामलीला संचालन वरिष्ठ पत्रकार व श्रीरामलीला कमेटी के मंच सचिव केवल कृष्ण बत्रा नें किया। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल महामंत्री विजय अरोरा, कोशाध्यक्ष नरेश शर्मा, डायरेक्टर हरीश सुखीजा डायरेक्टर आशीश ग्रोवर, महावीर आजाद, हरीश धीर, अमित अरोरा बोबी, राकेश सुखीजा, रामनाटक क्लब के महामंत्री गौरव तनेजा, विजय विरमानी, अमित चावला, अजय चड्डा, रमन अरोरा आदि मौजूद थे।




