Friday, September 4, 2026

यहां खड़ी स्विफ्ट कार से 4 घातक हथियार और 237 जिंदा कारतूस बरामद

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भोंपूराम खबरी। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के अंतर्गत आने वाले काशीपुर क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक खुफिया और सटीक सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में हथियारों और जिंदा कारतूसों का जखीरा बरामद किया है। एसटीएफ की इस बड़ी रेड के बाद से पूरे उत्तराखंड और विशेषकर उधम सिंह नगर जिले के प्रशासनिक और सुरक्षा महकमों में हड़कंप मच गया है। इस जब्ती के बाद से तमाम सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं और मामले की तह तक जाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। कार पार्किंग में खड़ी संदिग्ध स्विफ्ट कार से हुई बरामदगी

प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई काशीपुर क्षेत्र की एक निजी कार पार्किंग में अंजाम दी गई। एसटीएफ की 10 सदस्यीय एक विशेष टीम ने वहां खड़ी एक संदिग्ध स्विफ्ट कार (वाहन संख्या: UK18 P 5046) को चारों तरफ से घेर लिया। सटीक इनपुट के आधार पर जब इस कार की गहनता से तलाशी ली गई, तो एसटीएफ के अधिकारी भी दंग रह गए। कार के भीतर बेहद शातिर तरीके से छिपाकर रखे गए चार अलग-अलग श्रेणियों के घातक हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए।

12 बोर पंप एक्शन बंदूक: एक अत्याधुनिक और बेहद खतरनाक लंबी दूरी की बंदूक।

.22 बोर राइफल: सटीक निशानेबाजी और शिकार में इस्तेमाल होने वाली घातक राइफल।

.32 बोर पिस्टल: मैगजीन आधारित आधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल।

.32 बोर रिवॉल्वर: अपराधियों और सुरक्षात्मक उपयोग में आने वाला पारंपरिक हथियार।

237 जिंदा कारतूस: अलग-अलग बोर के हथियारों में इस्तेमाल होने वाली भारी मात्रा में गोलियां।

भारी मात्रा में कारतूस मिलने से सुरक्षा एजेंसियां चिंतित

एसटीएफ के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय केवल हथियार नहीं, बल्कि उनके साथ बरामद किए गए 237 कारतूस हैं। इतनी बड़ी संख्या में अवैध हथियारों का एक ही वाहन में मिलना किसी बड़ी और गंभीर साजिश की ओर इशारा करता है। प्रारंभिक जांच में अभी तक यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये हथियार वैध लाइसेंस के तहत खरीदे गए थे या फिर इन्हें अवैध रूप से तस्करी के माध्यम से यहां लाया गया था। हालांकि, कार को लावारिस या संदिग्ध परिस्थितियों में पार्किंग में खड़ा करना इसके पीछे किसी अवैध गतिविधि की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है।

वाहन स्वामी और हथियारों के स्रोत की तलाश तेज

इस बड़ी बरामदगी के बाद एसटीएफ के उच्चाधिकारियों ने तुरंत कई जांच टीमों का गठन किया है। वर्तमान में पुलिस और एसटीएफ का पूरा ध्यान वाहन के असली मालिक (Vehicle Owner) की पहचान करने पर केंद्रित है। वाहन पंजीकरण संख्या के आधार पर कार मालिक के पते और उसके संपर्कों की गहनता से पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित होकर काम कर रही हैं:

1. यह कार अंतिम बार किसके द्वारा चलाई जा रही थी और इसे इस निजी पार्किंग में कब और किसने खड़ा किया?

2. क्या इन हथियारों का संबंध किसी अंतरराज्यीय आपराधिक गिरोह (Criminal Gang) या हथियार तस्करी नेटवर्क से है?

3. इतनी बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और हथियारों को काशीपुर में किस संभावित उद्देश्य या वारदात को अंजाम देने के लिए इकट्ठा किया गया था?

आमतौर पर शांत और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाने जाने वाले काशीपुर क्षेत्र में इस तरह हथियारों का बड़ा जखीरा पकड़े जाने से स्थानीय जनता के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं और भय का माहौल है। उत्तराखंड का उधम सिंह नगर जिला उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है कि स्थानीय पुलिस और अन्य खुफिया एजेंसियां भी एसटीएफ के साथ मिलकर इनपुट साझा कर रही हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना या आतंकी – अपराधिक सांठगांठ को समय रहते पूरी तरह नेस्तनाबूद किया जा सके।

एसटीएफ अधिकारियों का आधिकारिक बयान

इस पूरी रेड और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे एसटीएफ निरीक्षक एमपी सिंह और अरुण कुमार ने बताया कि टीम को इस संबंध में एक बेहद पुख्ता और गोपनीय इनपुट मिला था, जिस पर बिना समय गंवाए त्वरित एक्शन लिया गया।

अभी जांच बिल्कुल शुरुआती और संवेदनशील चरण में है। हम हथियारों के फॉरेंसिक विश्लेषण और कार के बैकग्राउंड डेटा को खंगाल रहे हैं। कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं, जिन पर काम किया जा रहा है। जांच पूरी होते ही इस पूरे नेक्सस का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। देश और राज्य की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”

एमपी सिंह, निरीक्षक, स्पेशल टास्क फोर्स (STF)

काशीपुर में हुई एसटीएफ की इस बड़ी और सफल सर्जिकल स्ट्राइक को अवैध हथियारों के खिलाफ एक बहुत बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जैसे ही वाहन स्वामी और हथियारों के वैध या अवैध होने की स्थिति साफ होगी, इस मामले में कई बड़े नामों के बेनकाब होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

 

 

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