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Monday, April 15, 2024

कृषि कानूनों के खिलाफ तेज होगा किसान आंदोलन

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भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर।  केन्द्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आन्दोलन को और तेज करने की तैयारी कर ली है। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता सरदार जगतार सिंह बाजवा ने बताया कि बैठक आयोजित कर आगे के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई।

बाजवा ने बताया कि 15 मार्च कॉरपोरेट विरोधी दिवस व सरकार विरोधी दिवस मनाया जाएगा। इसमें डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस व अन्य आवश्यक वस्तुओं के बढ़ रहे दामो के खिलाफ जिला व तहसील मुख्यालयों पर डीएम और एसडीएम को ज्ञापन देकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसी दिन देशभर के रेलवे स्टेशनों पर मजदूर संगठनों के साथ निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। 17 मार्च को मजदूर संगठनों व अन्य जन अधिकार संगठनों के साथ 26 मार्च के प्रस्तावित भारत बंद को सफल बनाने के लिए एक कन्वेंशन की जाएगी। 19 मार्च को मुज़ारा लहर का दिन मनाया जाएगा और फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया तथा खेती बचाओ कार्यक्रम के तहत देशभर की मंडियों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। शहीद भगत सिंह के शहीदी दिवस पर 23 मार्च को देशभर के नौजवान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर किसानों के धरनों पर शामिल होंगे। 26 मार्च को किसान आंदोलन के 4 महीने होने पर पूर्ण रूप से भारत बंद किया जाएगा। 28 मार्च को देशभर में होली दहन में किसान विरोधी कानून जलाए जाएंगे।

बाजवा ने कहा कि सयुंक्त किसान मोर्चा हरियाणा की जनता का धन्यवाद करता है जिन्होंने किसान विरोधी भाजपा व जजपा सरकार के खिलाफ अपनी पूरी ताकत दिखाई। अपने आप को किसानी समाज से जुड़ी पार्टी बताने वाली जजपा का किसान विरोधी चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो गया है। इस आन्दोलन के चलते इन विधायकों का कोई राजनीतिक भविष्य नहीं बचा है। किसानों ने इन किसान विरोधी चेहरों के खिलाफ संघर्ष के बीज बो दिए है व इनकी कटाई भी जल्द होगी। हरियाणा के किसान इन भाजपा व जजपा विधायकों का सामाजिक बहिष्कार करके इस आंदोलन को तेज करेंगे।

बाजवा ने कहा कि किसान आंदोलन पूर्ण रूप से शांतमयी है। कुछ वेबसाइट को “सरब्लोह रैनसमवेयर” नामक सॉफ्टवेयर से किसान आंदोलन संबंधित धमकी भरे संदेश भेजे जा रहे है जो कि सयुंक्त किसान मोर्चा या पंजाब के किसान संगठनों से संबंधित नहीं है। किसान आंदोलन के नाम पर इस तरह की हड़ताल के तरीकों का हम समर्थन नहीं करते। बाजवा ने बताया कि लम्बे समय से उपेक्षा के शिकार बिहार के किसानों के जनजागरण के लिए 11 से 15 मार्च में बिहार में किसान यात्राएं निकाली जाएगी जिसका समापन 18 मार्च को सम्पूर्ण क्रांति दिवस पर पटना में विधानसभा मार्च में होगा जिसमें हज़ारो किसान भाग लेंगे।

वहीं मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन हर मौसम में मजबूत रहा है। पंजाब में पिछली गर्मियों से शुरू हुए इस आन्दोलन ने गहरी सर्दी में भी खुद को जिंदा रखा है। दो दिन पूर्व टिकरी बॉर्डर पर फिर बारिश हुई। हालांकि सरकार ने प्रदर्शनकारियों को सुविधाएं प्रदान नहीं की है पर किसानों ने इस आपदा से भी निपटने के पूरे प्रबंध कर लिए है।

 

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