Monday, November 2, 2026

दो तिहाई भाजपा विधायकों पर टिकट संकट! 32 सीटों पर नए चेहरों की तैयारी

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भोंपूराम खबरी. उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है। पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे ने कई मौजूदा विधायकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सर्वे में भाजपा की 47 विधानसभा सीटों में से 32 विधायकों के खिलाफ क्षेत्र में गहरी नाराजगी सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद पार्टी नेतृत्व कई सीटों पर टिकट बदलने और नए चेहरों को मौका देने की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

32 विधायकों के खिलाफ जनता की नाराजगी

आंतरिक सर्वे के अनुसार लोगों का गुस्सा सरकार से ज्यादा अपने-अपने क्षेत्रों के विधायकों के खिलाफ है। कई स्थानों पर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली, जनता से दूरी, स्थानीय समस्याओं की अनदेखी और संगठन के भीतर गुटबाजी को नाराजगी का प्रमुख कारण माना गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि इस नाराजगी को समय रहते दूर नहीं किया गया तो चुनाव में इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

जीत की हैट्रिक के लिए नए चेहरों पर दांव

भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। सूत्रों के मुताबिक जिन सीटों पर विधायकों के खिलाफ ज्यादा नाराजगी मिली है, वहां नए और लोकप्रिय चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है ताकि सत्ता विरोधी माहौल का असर कम किया जा सके।

सरकार के कामकाज को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया

सर्वे रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि राज्य सरकार के विकास कार्यों को आम लोगों ने सकारात्मक माना है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना हुई है। हालांकि स्थानीय स्तर पर कुछ प्रशासनिक ढिलाई, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर असंतोष भी दर्ज किया गया है।

 

धामी के लिए सुरक्षित सीट पर मंथन

भाजपा नेतृत्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए भी सुरक्षित विधानसभा सीट तलाशने पर विचार कर रहा है। पार्टी चाहती है कि मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में बिना किसी स्थानीय चुनावी दबाव के प्रचार कर सकें। इससे पहले वर्ष 2022 में धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे, जिसके बाद उन्होंने चंपावत विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी।

कमजोर विपक्ष के भरोसे नहीं रहना चाहती भाजपा

सर्वे में यह भी संकेत मिला है कि भाजपा विपक्ष की कमजोरी को अपनी ताकत मानकर नहीं चलना चाहती। पार्टी का मानना है कि उत्तराखंड की राजनीति में स्थानीय उम्मीदवार की छवि और जनता की नाराजगी चुनाव परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसलिए संगठन चुनाव से पहले हर सीट का गहन मूल्यांकन कर रहा है।

70 सीटों पर तैयार हुई विस्तृत रिपोर्ट

सूत्रों के अनुसार पिछले दो महीनों में प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, प्रबुद्ध नागरिकों और आम लोगों से अलग-अलग माध्यमों से फीडबैक लिया गया। इसी आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पार्टी नेतृत्व को सौंपी गई है।

हारी हुई सीटों पर भी दिखी उम्मीद

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा जिन 23 सीटों पर हार गई थी, उनमें से करीब 10 सीटों पर पार्टी की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। ऐसे में संगठन इन सीटों पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रहा है।

भाजपा का यह आंतरिक सर्वे साफ संकेत दे रहा है कि 2027 का चुनाव पुराने चेहरों के भरोसे नहीं, बल्कि प्रदर्शन के आधार पर लड़ा जाएगा। यदि संगठन ने रिपोर्ट को पूरी तरह लागू किया तो उत्तराखंड की राजनीति में इस बार टिकट वितरण के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिल सकता है।

 

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