Friday, September 4, 2026

मित्र पुलिस : वर्दी एक, भत्ते अनेक 

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भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर।  एक आम आदमी अलग-अलग सितारों और बैज वाले सभी अधिकारियों को एक ही वर्दी में देखता है। उनका सम्मान ‘खाकी’ के कारण एक समान करता है। अंतर नहीं करता क्योंकि एक आम आदमी के लिए उत्तराखंड पुलिस की ‘खाकी’ का अर्थ समग्र रूप से कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसी है। लेकिन दुर्भाग्यवश राज्य सरकार आमतौर पर इन कर्मियों के साथ वर्दी में समान व्यवहार नहीं करती है।

राज्य सरकार के लिए वर्दी के मामले में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों और प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) अधिकारियों के लिए अलग-अलग मानदंड हैं। यह विसंगति इतनी बड़ी है कि जहां आईपीएस अधिकारियों को उनकी वर्दी के लिए प्रति वर्ष बीस हजार रुपये का भुगतान किया जाता है, वहीं पीपीएस अधिकारियों को रखरखाव भत्ता के लिए केवल साठ रुपये प्रति माह दिया जाता है।

हैरत की बात यह है कि मॉडर्न पुलिसिंग का दम भरने वाले प्रदेश के डीजीपी को भी यह भान नहीं है कि पीपीएस संवर्ग की वर्दी के लिए आज भी चालीस साल पुराना आदेश चला जा रहा है। यही नहीं प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री ने भी मित्र पुलिस के इस वर्ग की और कतई ध्यान नहीं दिया है। आपको बता दें कि साल 1981 में अविभाजित उत्तरप्रदेश के दौरान तत्कालीन संयुक्त सचिव ने आदेश पारित कर पीपीएस संवर्ग के वर्दी भत्ते को प्रारंभिक वर्ष में 1800 रुपये, उसके बाद के सात वर्षों में 1500 रुपये और तत्पश्चात 60 रुपये प्रति माह करने के आदेश दिए थे। आज प्रदेश विभाजित होने और इस आदेश के चालीस साल बीतने पर भी यह मानक जस के तस हैं।

इसके विपरीत आईपीएस अधिकारीयों के लिए आदेश में परिवर्तन हुआ और साल 2017 के उत्तराखंड शासन के गृह अनुभाग के आदेश के तहत आईपीएस अधिकारियों को प्रतिवर्ष अपनी वर्दी के लिए रुपये बीस हजार का भुगतान किया जाता है। ज्ञातव्य है कि मात्र आईपीएस नहीं बल्कि सरकार ने 7वें वेतन आयोग या 7वें सीपीसी के तहत राजनयिकों और विशिष्ट विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के अधिकारियों के लिए ‘पोशाक भत्ता’ भी बढ़ा दिया है। सातवें वेतन आयोग ने पोशाक भत्ते के रूप में 10,000 रुपये के वार्षिक अनुदान की सिफारिश की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने साल 2019 की जून में वेतन वृद्धि और भत्तों पर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दी थी। सातवें वेतन आयोग के तहत, एसपीजी अधिकारियों को ऑपरेशनल ड्यूटी के दौरान 27,800 रुपये सालाना और नॉन-ऑपरेशनल काम पर 21,225 रुपये सालाना ड्रेस भत्ता मिलेगा।

नाम न छपने की शर्त पर एक वरिष्ठ पीपीएस अधिकारी ने कहा कि जब वर्दी एक है और जिम्मेदारियों की सीमायें भी एक हैं तो भत्ते में अंतर विरोधाभास पैदा करता ही है। अपने वरिष्ठों से तारतम्य बिठाने में भी चुनौतियाँ सामने आती है। ऐसे में यह सवाल उठान लाजिमी है कि जब बर्दी एक है तो उसके भत्ते में इतना विशाल अंतर किसलिए रखा गया है। ऐसे में आईपीएस और पीपीएस संवर्ग में परम्परागत अंतर रखने की दुर्भावना को भी बल मिलना लाजमी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस ओर ध्यान देते हुए यह विसंगति दूर करनी चाहिए।

 

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