Friday, September 4, 2026

सावन में भी कम बिक्री से परेशान फल विक्रेता

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भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। आमतौर पर श्रावण माह में फलों की खरीदारी डेढ़ से दोगुनी तक बढ़ जाती है। जबकि इस बार ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। जानकारों के मुताबिक इसका कारण फलों के महंगे होने के साथ हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप और तीसरी लहर के आने का डर है। फल विक्रेताओं की माने तो बीते दो वर्षो में फलों का काम लगभग आधा हो चुका है। जिसके चलते फल विक्रेताओं ने भी खपत को देखते हुए फलों की मात्रा में भी कटौती कर दी है।

मंदी को देखते हुए मंडी में भी थोक विक्रेताओं ने फलों की खरीद कम कर दी है। मंडी में अधिकतर फल स्थानीय क्षेत्रों से ख़रीदे जा रहे हैं। वहीं ऐसे फल जिनकी पैदावार दूसरे राज्यों में होती है वह भही कम मात्रा में मंगाए जा रहे हैं। बाकी फल स्थानीय बाज़ारों से ख़रीदे जा रहे है | मौसमी, केला और सेब जहां दूसरे राज्यों से आ रहे है वहीं आम, अमरुद, अन्नानास, बब्बु गोशा जैसे फल स्थानीय बाज़ारों से ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराये जा रहे है। नगर के बाजार में सेब सबसे महंगे 180 से 250 रुपये प्रति किलो के दाम पर बेचे जा रहे है। वही मौसमी, नाशपाती, अमरुद और केला 40 से 50 रुपये प्रति किलो के दाम पर बब्बूगोसा 80 रुपये और आम 50 से 80 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचे जा रहे है। फल विक्रेता रमेश ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते बाजार में मंदी छाई हुई है। ग्राहकों की कमी के चलते कमाई आधी हो चुकी है। फल विक्रेता किशन ने बताया कि पहले सोमवार को बाजार में तेज़ी आयी लेकिन उसके बाद एक बार फिर से बाजार धीमा होने के कारण व्यापरियों को मुनाफा नसीब नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण बाजार में थोक विक्रेता भी फलों की खरीदारी में कटौती कर रहे है।

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