भोंपूराम खबरी। रुद्रपुर पहले जमीन ढूंढने में पसीने छूटे, फिर बारिश में जलभराव इस वजह से ऊधम सिंह नगर में निर्माणाधीन नौ एसटीपी यानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्धारित समय पर नहीं बन पाएंगे। जबकि दिसंबर तक प्लांट तैयार करने का लक्ष्य था। इससे घरों व प्रतिष्ठानों से नदियों में छोड़े जाने वाले दूषित पानी का शोधन समय से नहीं हो पाएगा।
नदियों में नालों, नहरों के माध्यम से घरों व प्रतिष्ठानों से निकलने वाला दूषित पानी छोड़ा जाता है। जिस कारण नदिया प्रदूषित हो रही हैं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती से नदियों के जल को स्वच्छ बनाए रखने के लिए नमामि गंगे योजना शुरू की गई। ऊधम सिंह नगर में वर्ष, 2022 में शुरू हुई योजना के तहत जिले में काशीपुर, बाजपुर, किच्छा और सितारगंज की नदियों में गिरने वाले नाले व नहर चिह्नित किए गए। जिन पर नौ एसटीपी प्लांट बनाए जा रहे हैं। इन प्लांटों से 17.898 मिलियन लीटर पानी प्रतिदिन शोधन कर नदियों में जाएगा। जैसे जैसे दूषित पानी की मात्रा बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे डिस्चार्ज की मात्रा भी बढ़ती जाएगी। यह प्रोजेक्ट 15 साल को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है भविष्य में जरूरत के हिसाब से एसटीपी की क्षमता बढ़ाई जाएगी एसटीपी के लिए स्वीकृत 223.44 करोड़ रुपये में अब तक 152 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। प्लांट पूर्ण करने का लक्ष्य दिसंबर, 2024 तक है, मगर समय से प्लांट पूर्ण न होने के कारण अवधि की सीमा को बढ़ाकर मार्च, 2025 तक कर दी गई है। इस अवधि में हर हाल में पूरा करना है।
इन नालों से छोड़ा जाता है दूषित पानी
काशीपुर बहल्ला नदी
जसपुर खुर्द ड्रेन हेमपुर इस्माइल एक व दो ड्रेन बैलजुड़ी नाली
बेला नदी : गुलड़िया नाली नंबर एक व दो बिया नाला व आइस फैक्ट्री नाला कोसी नदी : सुल्तानपुर पट्टीकला तक नदी में मुकुंदपुर नाला एक दो व तीन किच्छा: गौला नदी वेदी मोहल्ला नाला वनखंडी मंदिर वाला नाला एल. वनखंडी मंदिर वाला नाला आर, शिव मंदिर वाला नाला आर व एल. शिव मंदिर वाला नाला सितारगंज: नधौर नदी ओधेरी नाला बाजपुर पिलखर डाउनस्ट्रीम घोगा नाला ।
प्लांट में ये भी बनेंगे रुद्रपुर आरएसपी यानी रा सीवेज पंपिंग स्टेशन, पीटीयू यानी प्राइमरी ट्रीटमेंट यूनिट, एसबीआर यानी सिक्वेंशियल बैच रिएक्टर एसएचयू यानी स्लग हैंडलिंग यूनिट, सीटीएच यानी क्लोरीन टोनर हाउस सीसीटी यानी क्लोरीन कटेक्ट टैंक, प्रशासनिक भवन, लैब कम एयर ब्लीवर रूम, इंटरनल रोड एंड ड्रेनेज, सीवर लाइन एंड नाला टैपिंग कर्मचारी आवास, सेप्टेज स्टोरेज टैंक आदि।
निकायों की बढ़ सकती है जिम्मेदारी
नदियों में जिन नहरों व नालों से दूषित पानी छोड़ा जाता है, उन नाले कई जगह चोक होते हैं। जिससे गंदा पानी सड़कों पर आ जाता है। इससे उठने वाली बदबू से लोगों को काफी परेशानी होती है। साथ ही संक्रामक बीमारी होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में निकायों की नालों को ठीक कराने की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।
प्रदूषित नदियों व नालों को चिहित करने भूमि की तलाश जमीन की रजिस्टी कराने में काफी समय लग गया था। नदियो नालों व नहरों के किनारे प्लांट बनाए जा रहे है। वर्षा सीजन में बारिश के बाद एक से डेढ़ माह तक जल भराव रहता है। इससे निर्माण प्रभावित हो जाता था निर्माण कार्य करीब 70 प्रतिशत हो चुका है। मार्च, 2025 तक निर्माण पूर्ण हो जाएंगे।सुनील जोशी, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम यूएस नगर




