भोंपराम खबरी। सिख समाज आज गुरु नानक देव जी का 553वां प्रकाशपर्व मनाने जा रहा है। गुरुद्वारों में विशेष आयोजन होंगे। समाज को एकजुटता, भाईचारा व समानता का संदेश देने वाले गुरु नानक देव का कुमाऊं से गहरा जुड़ाव रहा है। सिखों के पहले गुरु नानक देव ने कुमाऊं के कई स्थानों पर पैदल यात्रा कर किरत करो, नाम जपो, वंड छको का उपदेश दिया। हिंदी में इसका मतलब है नाम जपें, मेहनत करें और बांटकर खाएं। गुरुद्वारों में होने वाले लंगर में यह परंपरा सहज रूप से दिखती है।

सामाजिक संदेश देने के लिए गुरु नानक देव ने देशभर में धर्म प्रचार यात्रा की। जिसे नाम दिया उदासी। राष्ट्रीय सिख संगत के जिला महामंत्री दलजीत सिंह चड्ढा बताते हैं कि गुरु नानक देव ने 1514 में करतारपुर से अपनी तीसरी उदासी शुरू की। उस समय कलानौर, कांगड़ा, कुल्लू, देहरादून होते हुए नानक देव अल्मोड़ा पहुंचे थे। फिर रानीखेत, नैनीताल होते हुए नानकमत्ता गए।




