Friday, September 4, 2026

शहीद की मां का छलका दर्द, बोलीं- बहुएं भाग जाती हैं, कीर्ति चक्र लेने के 7 दिन के भीतर मायके चली गई शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह की पत्नी

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भोंपूराम खबरी। राष्ट्रपति भवन में 5 जुलाई को प्रैसिडेंट द्रौपदी मुर्मू ने सेना और अन्य सुरक्षाबलों के 10 जवानों को उनके शौर्य के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया। इसमें से 7 जवानों को मरणोपरांत सम्मान मिला। इस बीच इनमें से एक शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह को जब मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया लेकिन इस बीच एक बड़ा मोड़ सामने आया।

दरअसल, उनकी पत्नी स्मृति और मां मंजू सिंह ने इसे ग्रहण किया था। अभी 7 दिन भी नहीं गुजरे थे कि शहीद के घर में विवाद पैदा हो गया। शहीद के पिता रवि प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि, ‘बहू कीर्ति चक्र लेकर यहां से चली गई है। अपना एड्रेस भी चेंज करवा लिया है। हमारे पास कीर्ति चक्र की कोई रिसीविंग भी नहीं है। उसे भी बहू ले गई।’

वहीं, मां ने कहा कि बहुएं भाग जाती हैं। मेरे जैसा दुख किसी को न हो। सेना में निकटतम परिजन (एनओके) का जो निर्धारित मापदंड है वह ठीक नहीं है। परिभाषा में अविवाहित के लिए माता-पिता होते हैं और विवाहित के लिए जीवनसाथी। शहीद को दी जाने आर्थिक मदद निकटतम परिजन को ही दी जाती है। शहीद के पिता ने कहा कि बेटे की पांच महीने की शादी थी, कोई बच्चा नहीं है। दीवार पर लगी तस्वीर की ओर इशारा करते हुए बोले कि आज हमारे पास बस यही बचा है।

शहीद अंशुमन के पिता ने कहा कि निकटतम परिजन की परिभाषा के बारे में सवाल पूछे जाने चाहिए। इसमें बदलाव होना चाहिए। शहीद की पत्नी परिवार में रहेगी तो क्या होगा? नहीं रहने पर क्या होगा? बच्चे रहेंगे तो क्या होगा? माता-पिता का क्या होगा? कितने लोग परिवार के लोग उस पर निर्भर थे और वह कितनी जिम्मेदारी छोड़कर गया है? उन चीजों पर संशोधन हो। हमने इस बारे में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बात की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात करेंगे।

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