भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। प्रदेश का पहला मल कीचड़ उपचार संयंत्र (एफएसटीपी) शुरू होने के साथ ही नगर निगम की कमाई का जरिया बन गया है। साढ़े तीन महीने में सैप्टेज प्रबंधन शुल्क में निगम तीन लाख रुपये से अधिक की कमाई कर चुका है। शासन से संयंत्र को पेयजल निगम से नगर निगम को हस्तांतरित करने की कार्यवाही हो रही है।
केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत किच्छा बाईपास रोड पर फॉरेंसिक के पास एक एकड़ जमीन पर कीचड़ उपचार संयंत्र स्थापित किया गया है। 6.89 करोड़ की लागत से बने संयंत्र की क्षमता 125 केएलडी है। संयंत्र बनने के बाद मई अंतिम सप्ताह से इसमें कार्य शुरू गया है सिडकुल में एक कंपनी के संयंत्र में टैंकर खाली कराने के लिए 200 रुपये प्रति टैंकर का शुल्क दे रहे। निगम को अब अमृत योजना से बने संयंत्र से कमाई हो रही है। शहर में 13 निजी और एक टैंकर नगर निगम का है। एक सैप्टेज टैंक खाली कराने की एवज में 1500 रुपये का शुल्क लोगों से लिया जाता है लेकिन संयंत्र में टैंकर खाली कराने की एवज में टैंकर स्वामी को 10 फीसदी नगर निगम और 10 फीसदी संचालक कंपनी को देना होता है।
नगर आयुक्त नरेश दुर्गापाल ने बताया कि तीन महीनों में निगम को तीन लाख रुपये से अधिक राजस्व मिला है। शासन की ओर से संचालन के लिए किसी कंपनी को पांच साल के लिए देने का आदेश जारी होगा ।
रुद्रपुर एफएसटीपी की स्थापना को लेकर निवर्तमान मेयर रामपाल सिंह ने भी काफी प्रयास किए थे। उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद संयंत्र शुरू हो सका। संयंत्र में मानव मल से खाद तैयार होगी और उसका उपयोग कृषि कार्य में किया जा सकेगा।




