भोंपूराम खबरी,देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम के आला अधिकारी जहां एक ओर सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आ“वान पर निगम को 20 साल के घाटे से बाहर निकाल कर लाए हैं ,वही दूसरी ओर निगम के कतिपय अधिकारी भीतर खाने विभिन्न प्रकार के घोटाले को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे हैं।
उत्तराखंड परिवहन निगम की हाल ही में महालेखाकार की एक ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है ,जिसमें उत्तराखंड परिवहन निगम की कबाड़ बसों की नीलामी में 1.32 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। महालेखाकार कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 से 2023 के दौरान देहरादून, नैनीताल व टनकपुर मंडल में बसों की नीलामी की धनराशि में भारी अंतर है। इतना ही नहीं, जो वोल्वो बस कभी सड़क पर आई ही नहीं, परिवहन निगम ने उसके फास्ट टैग का भी 2.43 लाख रुपए का भुगतान कर दिया।
महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार परिवहन निगम ने बसों की नीलामी की रकम 7.09 करोड़ रुपए दर्शाई है जबकि टीसीएस रिटर्न में ये कीमत 8.42 करोड़ रुपए बताई गई है। रिपोर्ट में सामने आया है कि परिवहन निगम के पास इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं है। इसके अतिरिक्त आडिट रिपोर्ट में निजी बैंक में परिवहन निगम की ओर से रखी गई 29.54 करोड़ रुपए की राशि पर भी आपत्ति जताई गई है। महालेखाकार कार्यालय के मुताबिक उत्तराखंड शासन के वित्त अनुभाग के आदेश के क्रम में राज्य सरकार के सभी उपक्रमों व निगमों को अपनी धनराशि सार्वजनिक व राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा करनी होती है, लेकिन परिवहन निगम के 34 खातों में से आठ खाते निजी बैंकों में संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही जांच में ये भी पाया गया कि निगम अपनी बकाया धनराशि वसूलने की दिशा में भी कतई संजीदा नहीं है। लोकसभा चुनाव-2019, विधानसभा चुनाव-2022 व सरकार की ओर से चलाई जा रही जन-कल्याणकारी योजनाओं का बसों के माध्यम से किए गए प्रचार प्रसार के भुगतान का 25.76 करोड़ रुपये लंबित है, लेकिन अब तक परिवहन निगम ने इसके लिए कोई भी कारगर कोशिश नहीं की है. ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार मार्च-2023 तक परिवहन निगम में कुल 1243 बसें ;919 परिवहन निगम की अपनी और 324 अनुबंधितद्ध संचालित हो रही थीं , जिनमें यात्रियों की सुरक्षा व बसों की निगरानी के लिए कैमरे व जीपीएस लगाए जाने थे, मगर जांच में सामने आया कि बसों की निगरानी के लिए परिवहन निगम ने कोई व्यवस्था ही नहीं बनाई और वाल्वो बसों के अतिरिक्त अन्य सभी बसों में कैमरे टूटे हुए थे और जीपीएस भी बंद पाए गए.आडिट रिपोर्ट के मुताबिक निगम की ई-टेंडर प्रक्रिया में भी घोटाला सामने आया है। इसमें निगम के अधिकारियों की ठेकेदारों से साठगांठ की पोल खुली है। इस संबंध में 12 ई-टेंडर की जांच की गई। जिसमें पता चला कि छह ई-टेंडर एक ही कंप्यूटर से फाइल किए गए। ऑडिट टीम ने ये खुलासा कंप्यूटर के आइपी एड्रेस की जांच करने के बाद किया है। इसके साथ ही ऑडिट रिपोर्ट में परिवहन निगम की ओर से बसों के ठहराव के लिए अनुबंधित ढाबों के अनुबंध को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट से सामने आया है कि टेंडर कोई और व्यक्ति डालता है और ठेका किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 में निगम को 4.11 करोड़ रुपये की आय अनुबंधित ढाबों से हुई, लेकिन निगम अनुबंधित फर्म से जुड़ी अन्य सुविधाओं की जानकारी नहीं दे सका. स्मरणीय है कि इस मामले में निगम अधिकारियों के विरुद्ध विजिलेंस जांच भी चल रही है. ऐसे में सभी निगाहें विजिलेंस की अगली कार्यवाही पर टिकी रहना स्वाभाविक है।




