भोंपूराम खबरी,रूद्रपुर। भूरारानी स्थित स्वागत इनक्लेव में धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया हैं। बैंक कर्मियों की मिलीभगत से प्लाट स्वामी ने बैंक में बंधक मकान धोखाधड़ी करके बेच दिया। इसके बाद प्लाट चार बार बिक गया। प्लाट पर जब मकान बनने के बाद बैंक से रिकवरी का नोटिस आया तो मकान स्वामी के होश उड़ गये।
भवन स्वामी ने मामले में विक्रेता और पीएनबी बैंक कर्मियों के खिलाफ तहरीर दी है तहरीर के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। हाउस न0 डी -13 स्वागत एनक्लेन भूरारानी निवासी मनोज कुमार पुत्र किशन चन्द्र कालरा ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि उसने एक प्लाट संख्या डी 13 खसरा नं0 211/1 रकबा 167.28 वर्ग मीटर ग्राम भुरारानी में रजिस्ट्री वैनामा के जरिये श्रीमती आरती चन्द्रा पत्नी हिमाल चन्द्रा से 26 जुलाई 2021 को खरीदा था। प्लाट क्रय करने से पूर्व भूमि की खसरा खतौनी इत्यादि जाँच की गई तो उस पर कोई लोन इत्यादि की प्रविष्टी नहीं पाई गई। विक्रेता ने भी विश्वास दिलाया कि उक्त प्लाट पर कोई लोन इत्यादि नहीं है। प्लाट खरीदने के बाद उस पर 2022 में मकान का निर्माण पूर्ण कर लिया। मार्च 2023 को पीएनबी के कर्मचारी आए और मकान मे नोटिस चस्पा करने लगे, पूछने पर बताया इस प्लाट को मनीष गर्ग पुत्र आर0 के0 गर्ग द्वारा पीएनबी में लिए गए लोन के एवज में सन 2009 में बंधक रखा गया है और डिफाल्टर होने पर यह प्लाट को विक्रय किया जा रहा है।
पीड़ित ने बताया कि जब उसने जानकारी ली तो ज्ञात पता चला कि मनीष गर्ग ने यह प्लाट श्रीमती शशि लता अग्रवाल पत्नी भूपेन्द्र अग्रवाल को सन 2012 में विक्रय किया। जिसके बाद शशि लता अग्रवाल द्वारा यह प्लाट दो भाग में श्रीमती आशा अरोरा पत्नी ओम प्रकाश अरोरा तथा श्रीमती रचना पत्नी राजकुमार को सन 2013 में विक्रय किया। उसके बाद रचना पत्नी राजकुमार ने आधा प्लाट आशा अरोरा को सन 2017 मे विक्रय कर दिया तथा आधा प्लाट सन 2018 मे आशा अरोरा को विक्रय किया। इसके बाद आशा अरोरा पत्नी ओम प्रकाश अरोरा ने डी-13 खसरा 211/1 को श्रीमती आरती चन्द्रा पत्नी हिमाल चन्द्रा को सन 2018 में विक्रय किया। पीड़ित ने बताया कि प्लाट क्रय करने से पूर्व उक्त प्लाट की खतौनी एंव पूर्व के तीन विक्रय पत्रो का पूर्ण अवलोकन किया गया जिसके अवलोकन से यह कतई स्पष्ट नहीं था कि प्लाट पर कोई ऋण इत्यादि भी लिया गया है। पीड़ित का आरोप है कि उसके साथ्ज्ञ धोखाधडी, छल कपट कर प्लाट के पूर्व खरीददारो के साथ-साथ मनीष गर्ग द्वारा पी0एन0वी0 शाखा उचॉपुल हल्द्वानी के कर्मचारियों के साथ सांठ-गांठ कर बंधक किया हुआ प्लाट जिसका इन्द्राज भी जानबूझकर खतौनी में नहीं किया गया है, छल कपट कर रकम हडपने की नियत से विक्रय किया गया है। आरोप है कि पीएनबी शाखा उचापुल द्वारा जानबूझकर मनीष गर्ग पुत्र आर0के0गर्ग के साथ साठ-गांठ कर सन 2009 के लोन की एवज में रखे उक्त प्लाट का इन्द्राज जानबूझकर खतौनी में नहीं करवाया न ही रजिस्ट्री आफिस में कोई जानकारी दी गई। सन 2009 के उपरांत सन 2022 तक कोई भौतिक सत्यापन प्लाट का नही किया।सन 2009 में यह प्लाट लगभग 5 बार विक्रय किया गया और खतौनी में हर बार दाखिल खारिज किया गया। बैंक द्वारा कभी कोई आपत्ति न तो विक्रय होने पर न ही दाखिल खारिज होने पर की गई। मनीष गर्ग द्वारा तथ्यों को छिपाकर प्लाट की रजिस्ट्री अन्य व्यक्तियो को की गयी जिस धोखाधड़ी मे पी0एन0बी0 बैंक भी शामिल है। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।




