भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। एनएच 74 घोटाले में जेल जा चुके एक बिल्डर का नया कारनामा सामने आया है। उच्च न्यायालय में बाद लंबित होने और रेरा द्वारा यथा स्थिति के आदेश के बावजूद इस कॉलोनी में खुलेआम प्लाटों की खरीद-फरोख्त के साथ ही निर्माण कार्य चल रहा है। बिल्डर ने योजनाबद्ध तरीके से अपने भूखंडों को दानपत्र के जरिए परिजनों के नाम कर दिया है।
हम बात कर रहे हैं महानगर से सटी कीरतपुर कोल्डा गांव में पांच एकड़ में काटी गई पंचवटी विला कालोनी की, जिसमें रेरा और उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना हो रही है, मगर जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। कहीं न कहीं इस मामले में भी भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में काशीपुर हाइवे से सटी मनिहार खेड़ा रोड पर कीरतपुर कोल्डा गांव में 5 एकड़ भूमि पर पंचवटी विला नाम से कॉलोनी काटी गई थी। उसके बाद रेरा लागू हो गया। इस कालोनी का रेरा में पंजीकरण 2017 में हुआ, जिसका नवीनीकरण 22 अक्टूबर 2021 में होना था, लेकिन पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं हुआ। सूत्रों की माने तो नवीनीकरण कराने के लिए रेरा ने 31 दिसंबर 2021 को नोटिस भी जारी किया, लेकिन बिल्डर सुधीर चावला और सुरेंद्र कुमार चावला द्वारा रेरा रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण नहीं कराया। वर्तमान में पंचवटी विला का नवीनीकरण नहीं हुआ है।
बावजूद इसके लगातार प्रोजेक्ट में बिला का निर्माण और भूखंडों की रजिस्ट्री कराई जा रहीं हैं। जबकि नियमानुसार रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकती। इसमें रजिस्ट्री दफ्तर की भूमिका पर सवाल खड़े होना लाजमी है। आखिर कैसे रजिस्ट्रियां हो रहीं हैं। बताया तो यहां तक जा रहा है रजिस्ट्री के दौरान पुराने रेरा नंबर को अंकित किया गया, जबकि पंजीकरण का नवीनीकरण नही था।
बाद में कुछ रजिस्ट्रियों में झूठा शपथ पत्र दिया गया, प्रोजेक्ट के रेरा में रजिस्टर्ड नहीं होने की बात कही गई है। इन लोगों ने नियम कानून को ताक पर रखकर कार्य किया, जिसमें कहीं कहीं सांठगांठ की ओर इशारा मिलता है।
बताया जा रहा है कि पंचवटी विला को लेकर साझेदारों के बीच विवाद चल रहा है, जो अब उच्च न्यायालय में भी लंबित है। बावजूद रेरा और उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए प्रोजेक्ट में खुलेआम खरीद फरोख्त की जा रही है और निर्माण कार्य भी चल रहा है।
सूत्रों का कहना है कि कोर्ट से यथास्थिति का आदेश दूसरा पक्ष हासिल न कर ले, इस आशंका के चलते बिल्डर सुधीर चावला और सुरेंद्र कुमार चावला ने शपथ पत्र देते हुए अपने-अपने हिस्से की सारी रजिस्ट्री का दाननामा अपनी पत्नी आकांक्षा चावला और बलजीत रानी के नाम कर दिया गया। सुधीर कुमार चावला ने 2098.03 वर्ग मीटर अपनी पत्नी आकांक्षा चावला के नाम जबकि सुरेंद्र कुमार चावला द्वारा अपनी पत्नी बलजीत रानी के नाम 1171 वर्ग मीटर भूमि दान में दिखा दी गई। परिजनों को भूमि दानपत्र के आधार पर देना कुछ अजीब तो लगता है। बहरहाल, जिला प्रशासन यदि इस प्रकरण की जांच कराए तो अन्य गड़बड़ियों का भी खुलासा हो सकता है, साथ संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत का भी पर्दाफाश हो सकता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अफसर कब तक इस मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई करते हैं।




