Friday, September 4, 2026

मां से किया वादा न पूरा कर सके कैप्टन शुभम गुप्ता, 26 साल की उम्र में राजौरी में हुए शहीद

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भोंपूराम खबरी। जम्मू के राजौरी (Jammu Rajouri Encounter) में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में आगरा के सपूत कैप्टन शुभम गुप्ता शहीद हुए हैं। उनके शहीद होने की खबर बुधवार शाम 7 बजे परिवार को मिली। खबर सुनते ही परिवार शोक में डूब गया। शुभम से दिवाली पर परिवार के लोगों ने वीडियो कॉल पर बात की थी। तब उन्होंने अगले सप्ताह आने की बात कही थी। अभी 6 माह पहले शुभम आगरा आए थे। परिवार के साथ आगरा में शुभम ने अपना 26 वां जन्मदिन मनाया था।

ताजनगरी में फेस 1 प्रतीक एन्क्लेव के रहने वाले बसंत गुप्ता डीजीसी क्राइम के शासकीय अधिवक्ता है। उनके बेटे शुभम गुप्ता 9 पैरा स्पेशल फोर्स में कैप्टन थे। शुभम का चयन वर्ष 2015 में हुआ था। वर्ष 2018 में शुभम को कमीशन मिला था। हाईस्कूल की परीक्षा पास के करने के बाद से शुभम सेना में जाने की तैयारियों में जुट गए थे। परिवार के सदस्यों ने बताया कि बुधवार की शाम करीब 4 बजे उन्हें फोन आया कि राजोरी मुठभेड़ में शुभम घायल हो गए हैं। इसकी सूचना पाते ही शुभम के भाई ऋषभ गाड़ी लेकर जम्मू के लिए निकल गए थे। रास्ते में शुभम के शहीद होने की सूचना मिल गई। पिता बसंत गुप्ता शुभम की शादी की तैयारियां कर रहे थे।

शासकीय अधिवक्ता बसंत गुप्ता अपने होनहार बेटे के कंधों पर सेना की वर्दी देखकर बेहद खुश रहते थे। अधिवक्ता नितिन वर्मा ने बताया कि पिछली बार जब शुभम आगरा अपने घर आए थे तो उनके पिता उन्हें दीवानी लेकर आए थे। बेटा सेना में कैप्टन था। इससे बसंत गुप्ता का सीना गर्व से चौड़ा रहता था। दिवाली पर शुभम की अपने छोटे भाई ऋषभ, मां और पिता से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। शुभम ने अगले सप्ताह आने की बात कही थी। घर वाले शुभम का इंतजार कर रहे थे। इधर पिता बसंत गुप्ता शुभम की शादी की तैयारियों में लगे थे। शुभम के आने पर उसकी सगाई का कार्यक्रम होना था, लेकिन शुभम तो नहीं आया खबर आई उसके बलिदान की।

शुभम आगरा के सेंट जोर्जेस स्कूल में पढ़ता था। उसके ताऊ तोताराम गुप्ता सेना के मेडिकल कोर में तैनात थे। भाई नितिन ने बताया कि शुभम ताऊ जी से प्रेरणा लेकर सेना में भर्ती हुए थे। पिछले साल 9 अक्टूबर को शुभम का जन्मदिन आगरा में ही मनाया गया था। उस समय वह आगरा आया हुआ था। सबने उसे कंधों पर उठाकर गीत गाए थे। शुभम बहुत खुश था, लेकिन इस बार वह नहीं आए थे। उन्हें फोन पर ही जन्मदिन की बधाई दी गई थी। शुभम ने दिवाली के बाद आने का वादा किया था।

शुभम पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल थे। हाई स्कूल की परीक्षा में शुभम अपने स्कूल सेंट जोर्जेस के टॉपर रहे थे। इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शुभम ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और फिर देहरादून इंडियन मिलिट्री एकेडमी में वर्ष 2015 में प्रवेश लिया। वर्ष 2018 में उन्हें सेना में कमीशन मिला। जांबाज शुभम ने सेना में रहकर कई स्पेशल फोर्सेस की कठिन ट्रेनिंग की थी। शुभम ने कई स्पेशल ऑपरेशनों को अंजाम दिया था। शुभम की पहली पोस्टिंग ऊधमपुर में हुई थी।

आज आ सकता है पार्थिव शरीर

शुभम के शहीद होने की सूचना पर हर कोई स्तब्ध रह गया। शाम को प्रशासनिक अधिकारी और सांसद एसपी सिंह बघेल, राजकुमार चाहर, एमएलसी विजय शिवहरे समेत अन्य जनप्रतिनिधिगण बसंत गुप्ता के घर पहुंच गए। परिवार को लोगों ने ढांढस बंधाया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि आज शुभम का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंच सकता है। courtsy-NBT

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