भोंपूराम खबरी,रूद्रपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विजय शंखनाद रैली को भाजपाई भले ही ऐतिहासिक बता रहे हो लेकिन हकीकत यह है कि इस बार की रैली मोदी की पिछली रैलियों जितनी भीड़ नहीं जुटा पायी। इसके पीछे कारण जो भी रहे हों लेकिन भीड़ का कम जुटना भाजपा की चुनावी रणनीति पर प्रश्न जरूर लगा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किच्छा बाईपास रोड स्थित मैदान में सबसे पहले साल 2014 में चुनावी रैली की थी। उस समय मोदी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था। जिसके चलते मोदी की इस पहली रैली में ऐतिहासिक भीड़ जुटी। हालत यह थी कि मैदान में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। लोग छतों और पेड़ों पर भी चढ़कर मोदी को सुन रहे थे। इस रैली की सफलता के बाद से ही इस मैदान का नाम मोदी मैदान पड़ गया। इसके बाद मोदी ने साल 2017, 2019 और 2022 में भी इस मैदान में महारैलियां की। जो सफल रही। रैली में भीड़ इस बार भी कम नहीं थी लेकिन पहले की रैलियों जितनी भीड़ जुटाने में भाजपाई नाकाम रहे।
इस रैली की तैयारी के लिए भाजपाईयों को सिर्फ चार दिन मिले थे, रैली की तैयारियों के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा भी रैली की तैयारियों के लिए रूद्रपुर में डेरा डाले रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर रैली में भारी भीड़ जुटाने के लिए रणनीति तैयार की थी। रैली में एक लाख की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। हर विधानसभा क्षेत्र से 50 बसों की व्यवस्था करने का दावा किया गया। लेकिन ये दावे फेल हो गये। हालाकि इसके दो कारण माने जा रहे हैं एक तो धूप की तपिश और दूसरा रैली की तैयारियों के लिए भाजपाईयों को समय बहुत कम मिला। प्रधानमंत्री की पूर्व की रैलियों में मोदी मैदान भीड़ से खचाखच भरा होता था। लेकिन इस बार मोदी की रैली पहले की तरह भीड़ नहीं खींच पाई। जानकारों की मानें तो विजय शंखनाद रैली में भीड़ का आंकड़ा एक लाख की संख्या को पार नहीं कर पाया। यह स्थिति तब है कि जबकि नैनीताल उधम सिंह नगर लोकसभा क्षेत्र की 14 विधानसभाओं में कार्यकर्ताओं को बसों में भरकर यहां लाया गया था। उत्तराखण्ड के साथ साथ यूपी से भी कार्यकर्ता इस रैली में जुटे थे, लेकिन इसके बावजूद भीड़ की संख्या पिछले आंकड़े को नहीं छूं पाई। हालाकि भाजपा के लोग रैली को ऐतिहासिक बताते हुये अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं लेकिन चर्चा है कि रैली उतनी सफल नहीं हो पायी जितनी उम्मीद की जा रही थी। बहरहाल प्रधानमंत्री मोदी की यह पांचवी चुनावी रैली का मतदाताओं पर क्या असर होगा यह तो आने वाला वक्त बतायेगा।




