भोंपूराम खबरी,रूद्रपुर। प्रदेश की भाजपा सरकार की मजबूत पैरवी के अभाव में उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के चलते नजूल भूमि पर बसे हजारों परिवार पर फिर उजड़ने का खतरा मंडराने लगा है। नजूल भूमि पर बसे लोगों के हक पर राज्य सरकार की अनदेखी के चलते हजारों परिवारों में सरकार के प्रति तीव्र रोष है ।
जिसका खमियाजा भाजपा को आने वाले निकाय चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। नजूल भूमि पर भूमिधरी के अधिकार पर रोक लगाये जाने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सरकार द्वारा कोई पैरवी न किये जाने से हजारों परिवार खुद को ठगा महसूस कर रहे है। उच्च न्यायालय ने एक पीआईएल पर अपना अन्तरिम आदेश देते हुये नजूल भूमि पर बसे अतिक्रमणकारियों को भूमिधरी का अधिकार न दिये जाने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार पीआईएल 159/2020 पर 21 फरवरी 2024 को अपना अन्तरिम आदेश देते हुये उच्च न्यायालय ने कहा कि नजूल भूमि फ्री-होल्ड नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी संख्या 27862/2018 पर जब तक कोई निर्णय नही आ जाता तब तक अतिक्रमणकारियों को नजूल भूमि पर कोई भूमिधरी अधिकार न दिया जाये। उच्च न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा कोई अपील न किये जाने से नजूल भूमि पर बसे हजारों परिवार अपने आपको ठगा महसूस कर रहे है। उत्तराखण्ड के देहरादून,हरिद्वार,उधमसिंहनगर और नैनीताल जिले में हजारों परिवार नजूल भूमि पर बसे हुये हैं। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद नजूल भूमि पर अनाधिकृत रूप से बसे हजारों लोगों की फ्री होल्ड फाईलों पर काम रूक गया जिसके चलते लोगों में सरकार के प्रति आक्रोष व्याप्त है। यहां बता दें कि उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2018 में भी एक पीआईएल की सुनवाई के पश्चात नजूल भूमि फ्री-होल्ड नीति पर रोक लगाई थी जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोई में एसएलपी दाखिल की गई। एसएलपी पर सुनवाई के पश्चात सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय द्वारा फ्री-होल्ड नीति पर लगाई गई रोक पर स्टे दे दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर स्टे मिलने के पश्चात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने कैबिनेट बैठक में नजूल नीति 2021 पर मोहर लगाकर प्रदेश वासियों को नजूल भूमि को फ्री होल्ड कराये जाने की सौगात दी। दिसम्बर 2023 में इसकी अवधि खत्म होने के बाद पुनः एक वर्ष के लिये बढ़ा दिया गया । लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता और अधिकारियों की व्यस्तता के चलते नजूल भूमि फ्री-होल्ड नीति का आम लोगों को लाभ नही मिल सका। लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने के बाद जब लोगों ने फ्री-होल्ड पर पैरवी शुरू की तो पता चला कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा नजूल भूमि पर बसे अनाधिकृत लोगों को भूमिधरी का अधिकार दिये जाने पर रोक लगा दी है। 21 फरवरी 2024 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा कोई अपील नही की गई। राज्य सरकार की सुस्ती के चलते नजूल भूमि पर बसे हजारों परिवारों में रोष व्याप्त है।
निकाय चुनाव में भाजपा की नैया डूबा सकता है नजूल भूमि मुद्दा। एक बार फिर बोतल से बाहर आ सकता है नजूल भूमि का जिन्न, सरकार की ढिलाई के चलते थमा नजूल भूमि फ्रीहोल्ड अभियान
रुद्रपुर। इसी साल मार्च में शासन-प्रशासन एवं भाजपा नेताओं की तमाम नौटंकी के बाद रुद्रपुर में आरंभ किया गया नजूल भूमि पर भूमिधरी अधिकार का अभियान, फिलहाल कहीं गुम सा हो गया है ,लेकिन यह शहरी क्षेत्र से जुड़ा प्रमुख मुद्दा होने के कारण नजूल भूमि का ‘जिन्न’ एक बार फिर बोतल से बाहर निकलना लगभग तय तो है ही, साथ ही यह मसला आगामी नगर निकाय चुनाव में भाजपा को बैक फुट पर भी धकेल सकता है। वह इसलिए क्योंकि सूबे की भाजपा सरकार नजूल भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक देने की दिशा में कभी भी गंभीर और ईमानदार नहीं रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में फ्रीहोल्ड नीति 2021 लागू कर जहां नजूल भूमि पर बसे लोगों को लाभ देने के साथ-साथ गरीब लोगों को 50 वर्ग मीटर तक की भूमि का निःशुल्क पट्टा देने का ऐलान कर नजूल भूमि पर बसे लोगों का दिल जीत लिया था। रुद्रपुर विधायक और नगर निगम के तत्कालीन मेयर सहित भाजपा के कई नेताओं ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुये खूब ढोल-नगाड़े बजवाये और लड्डु बांट कर इसका स्वागत किया और आनन फानन में आधे-अधूरे एवं नियम विरुद्ध आयोजित पट्टा वितरण अभियान को गरीब कल्याण की दिशा में उत्तराखंड सरकार का अभूतपूर्व कदम एवं अपने प्रयासों का नतीजा बताने का प्रयास किया। हम इसी साल मार्च महीने 6 तारीख को रुद्रपुर के गांधी पार्क में आयोजित नजूल भूमि पट्टा वितरण कार्यक्रम को नियम विरुद्ध इसलिए कह रहे हैं ,क्योंकि जानकारी के मुताबिक नैनीताल उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 21 फरवरी 2024 को रिट याचिका क्रमांक 159 / 2020 की सुनवाई के दौरान राज्य में नजूल भूमि पर काबिज अतिक्रमणकारियों को ,सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील संख्या 27862/2018 के निराकरण तक नजूल भूमि पर भूमि धरी अधिकार देने पर रोक लगा दी थी। अब दिनांक 21 फरवरी 2024 को नजूल भूमि पर अतिक्रमणकारियों को भूमिधरी अधिकार देने पर नैनीताल उच्च न्यायालय की रोक के बावजूद, उधम सिंह नगर प्रशासन ने दिनांक 6 मार्च 2024 को एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा 2600 लोगों को नजूल भूमि का पट्टा वितरण किस आधार पर कराया ? यह तो उधम सिंह नगर प्रशासन के आला अधिकारी ही जानें, मगर हाईकोर्ट द्वारा नजूल भूमि के अतिक्रमणकारियों को भूमिधरी अधिकार दिए जाने पर रोक लगा दिए जाने के बाद,उत्तराखंड सरकार द्वारा हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती न दिए जाने के चलते सरकार की गरीब कल्याण प्रतिबद्धता पर एक ऐसा बड़ा सवालिया निशान लग गया है, जिसके आधार पर विपक्ष आगामी नगर निकाय चुनाव में धामी सरकार को कटघरे में खड़ा कर,भाजपा को बैकफुट में जाने पर विवश कर सकता है। खास बात तो यह है कि गरीबों के हित से जुड़े इस अहम मसले पर उत्तराखंड सरकार का ढुलमुल रवैया तब सामने आया है, जब सरकार के पास काबिल अधिवक्ताओं की एक बड़ी फौज मौजूद है। बताने की जरूरत नहीं कि सरकार के अधिवक्ताओं के हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से, नजूल भूमि पर बसे लोगों को भूमिधरी अधिकार देने का महाअभियान शुरुआत में ही कमजोर पड़कर ठहर गया। वही दूसरी ओर नजूल भूमि पर अनाधिकृत रूप से कई वर्षो से बसे हजारों लोग अपने अशियानों की भूमि को फ्री होल्ड कराये जाने की आस में नगर निगम और कलेक्ट्रेट स्थित विभिन्न विभागों के चक्कर ही काटते रहे, लेकिन उनको कुछ हासिल नही हो पाया। हालात अब कुछ ऐसे बन पड़े हैं कि नगर निगम रुद्रपुर और प्रशासन के पास नजूल भूमि को फ्री होल्ड कराए जाने संबंधी हजारों एप्लीकेशन लंबित पड़ी है और लोग नगर निगम और कलेक्ट्रेट के विभिन्न दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।




