Saturday, September 5, 2026

न रैलियों में, न पोस्टर में… चुनाव प्रचार में नहीं दिखेंगे बच्चे, EC ने जारी की सख्त गाइडलाइन

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भोंपूराम खबरी। लोकसभा चुनाव में अब कुछ समय ही शेष बचा है। राजनीतिक पार्टियों ने अपने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने भी अपनी कमर कस ली है। चुनाव आयोग ने सोमवार को लोकसभा चुनाव को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की है। आयोग ने राजनीतिक पार्टियों, नेताओं और चुनाव मशीनरी को राजनीतिक प्रचार और रैली में बच्चों का इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, अपने माता-पिता के साथ बच्चे की उपस्थिति मात्र या किसी नेता के साथ अभिभावक और बच्चे का होना दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

न रैलियों में, न पोस्टर में… चुनाव प्रचार में नहीं दिखेंगे बच्चे, EC ने जारी की सख्त गाइडलाइन

2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. सोमवार को चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार में बच्चों और नाबालिग को शामिल न करने की हिदायत दी है. आयोग ने सख्य निर्देश जारी किए हैं और कहा है कि आम चुनाव में प्रचार के पर्चे बांटते हुए, पोस्टर चिपकाते हुए, नारे लगाते हुए या पार्टी के झंडे बैनर लेकर चलते हुए बच्चे या नाबालिग नहीं दिखने चाहिए।

चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव संबंधी कार्यों या चुनाव अभियान गतिविधियों में बच्चों को शामिल करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. इस गाइडलाइन में किसी भी तरीके से बच्चों का राजनीतिक अभियान में शामिल करना, जिसमें कविता पाठ करना, गीत, नारे या बच्चों के द्वारा बोले गए शब्द या फिर उनके द्वारा किसी भी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार के प्रतीक चिन्हों का प्रदर्शन करना शामिल है. चुनाव अभियान संबंधी गतिविधियों में बच्चों को शामिल करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

आयोग ने कहा कि अगर कोई भी दल अपने चुनाव प्रयास में बच्चों को शामिल करते हुए पाया गया तो बाल श्रम से संबंधित सभी अधिनियम, कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी. इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी को कार्रवाई करने के जिम्मेदारी दी गई है।

हालांकि, किसी राजनीतिक नेता के आसपास अपने माता-पिता या अभिभावक के साथ एक बच्चे की मौजूदगी को चुनाव प्रचार गतिविधि में शामिल नहीं किया गया है और न ही इस गाइडलाइन का उल्लंघन माना जाएगा।

आयोग ने बच्चों से प्रचार कराने पर पकड़े जाने पर कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को बाल श्रम (निषेध और विनियमन) द्वारा संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

आयोग ने अपने नोटिस में बताया कि सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना है। आयोग ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले का भी जिक्र किया है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आयोग ने अपनी गाइडलाइन में बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संशोधित अधिनियम, 2016 का सभी राजनीतिक दलों को बच्चों को चुनाव प्रचार शामिल न करना सुनिश्चित करें और दल अपने उम्मीदवारों को इसकी अनुमति न दें।

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