Friday, September 4, 2026

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है, जानिए इसका महत्व

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भोंपूराम खबरी। हिंदू धर्म में नाग पंचमी के पर्व का बहुत ही खास महत्व है। नाग पंचमी का पर्व नाग देवता की पूजा को समर्पित होता है। इस दिन नाग देवता की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। नाग पंचमी का पर्व हर साल सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल नाग पंचमी का त्योहार 9 अगस्त 2024 को मनाया जाएगा। नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता को दूध पिलाया जाता है। इसके साथ शिव मंदिर में जाकर शिव जी की और नाग देवता की पूजा की जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं नाग पंचमी क्यों मनाया जाता है और इसके महत्व के बारे में।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है

नाग पंचमी मनाने के पीछे पौराणिक कहानी है। प्राचीन कथा के अनुसार अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित की मृत्यु सांप के डंसने के कारण हुई थी। पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए उनके बेटे जनमेजय सारे सर्पों को मारना शुरू कर दिय। दाह यज्ञ में संसार के सारे सांप जलने लगे। सांप लोग अपने बचाव के लिए आस्तिक मुनि के शरण में गए। मुनि ने राजा जनमेजय को बहुत ही समझा बुझा कर यज्ञ को रूकवा दिया। जिस दिन यज्ञ रुकवाया गया है। उस दिन सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। उस दिन आस्तिक मुनि के कारण नागों के प्राणों की रक्षा हो पाई। उसके बाद से ही इस दिन से नाग पंचमी मनाने की शुरुआत हो गई। तब से हर साल सावन की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है।

नाग देव मंत्र

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।

शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥

नाग पंचमी शुभ मुहूर्त 2024

हिंदू पंचांग के अनुसार हर नाग पंचमी का पर्व हर साल सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल इस तिथि की शुरुआत 9 अगस्त को प्रात: 12 बजकर 36 मिनट पर होगा। वहीं इस तिथि का समापन 10 अगस्त को प्रात: 03 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में 9 अगस्त 2024 को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05.47 से लेकर 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

नाग पंचमी महत्व

शास्त्रों में नाग पंचमी का बहुत ही खास महत्व है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से नाग देव प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही इस दिन नागों की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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