भोंपूराम खबरी। निवर्तमान मेयर रामपाल के कार्यकाल के अंतिम दिनों में जारी हुए 112 विकास कार्यों पर तलवार लटक सकती है। 13 करोड़ के इन टेंडरों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए वार्ड नं. 36 के निवर्तमान पार्षद रंजीत सागर ने जिलाधिकारी सहित शासन में भी शिकायत करते हुए जांच की मांग की है।
बता दें निवर्तमान मेयर रामपाल के कार्यकाल के अंत में आयोजित बोर्ड की बैठक में 112 विकास कार्याें के प्रस्ताव पारित किये गये। 13 करोड़ लागत के इन विकास कार्यों के टेंडर भी जारी हो गये। अब इन टेंडरों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वार्ड नं. 36 के निवर्तमान पार्षद रंजीत सागर ने इस मामले में जिलाधिकारी सहित मण्डलायुक्त, मुख्यमंत्री , शहरी विकास मंत्री और राज्यपाल को शिकायती पत्र प्रेषित किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि दो दिसम्बर को ही नगर निगम का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। नगर निगम प्रशासन द्वारा नवम्बर माह में बजट न होने के बावजूद विकास का हवाला देते हुए 112 विकास कार्यों के टेंडर जारी किये जबकि नगर निगम पर ठेकेदारों का कई करोड़ रूपये की देनदारी बकाया है। यही नहीं मेयर रामपाल ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन एक दिसम्बर को नगर निगम प्रांगण में सभी विकास कार्यों का सामूहिक रूप से पत्थर लगाकर शिलान्यास भी नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारियों की गैरमौजूदगी में कर दिया। निवर्तमान पार्षद ने कहा है कि टेंडर प्रक्रिया का यदि गहनता से अध्ययन करें तो स्पष्ट होता है कि आज से पहले जो भी विकास कार्यों के टेंडर नगर निगम प्रशासन द्वारा जारी किये हैं वह निर्धारित रेट से 15 से 30 प्रतिशत कम दामों में ठेकेदारों को दिये गये हैं। जबकि इस बार सभी ठेकेदारों द्वारा एकजुट एक राय होकर पूल बनाकर टेंडर अधिकतम 4 प्रतिशत कम रेट पर ही तय किये गकये हैं। निवर्तमान पार्षद ने शिकायत में कहा उन्हें ज्ञात हुआ है कि सभी कार्यों के वर्कआर्डर कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी बैकडेट में जारी कर दिये जायेंगे। जिससे सरकार को करोड़ों रूपये का नुकसान होगा तथा ठेकेदारों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए इस सारी प्रक्रिया को आंजाम दिया गया है। शिकायत में इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर टेंडर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की गयी है। फिलहाल पूरी टेंडर प्रक्रिया अब संदेह के घेरे में आ गयी है जिसके चलते 13 करोड़ के विकास कार्य लटक सकते हैं।




