Friday, September 4, 2026

धाम में अभी भी हैं 2300 लोग, 400 आज लौटेंगे वापस, अब बिना भक्तों के होगी बाबा की आरती

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भोंपूराम खबरी। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर अतिवृष्टि के बाद उपजे हालातों के बीच पांच दिनों में शासन, प्रशासन के रेस्क्यू अभियान में 11775 यात्री व स्थानीय लोगों को धाम सहित पैदल मार्ग से सुरक्षित निकाल दिया गया है।

अब, धाम में 50 श्रद्धालुओं सहित 2300 लोग हैं, जिसमें 400 मंगलवार को पैदल मार्ग से वापस लौट आएंगे। इन लोगों का एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के जवानों के साथ ही हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया जाएगा।

इसके बाद केदारपुरी में बेस कैंप से मंदिर क्षेत्र तक 1900 लोग रहेंगे, जिसमें बीकेटीसी स्टॉफ, तीर्थपुरोहित, हक-हकूकधारी, जीएमवीएन स्टॉफ, सुरक्षा कर्मी व मजदूर शामिल हैं। कोरोनाकाल के बाद यह दूसरा मौका होगा, जब मंगलवार से बिना दर्शनार्थियों के बाबा केदार की पूजा-अर्चना होगी।

10 मई से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में 31 जुलाई तक 10 लाख 91 हजार 316 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके थे। इसी दिन देर शाम को गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भीमबली से लिनचोली के बीच अतिवृष्टि से व्यापक नुकसान हो गया था, जिससे हजारों यात्री पैदल मार्ग पर कई जगहों पर फंस गए थे। साथ ही एक अगस्त से पैदल व हवाई यात्रा भी ठप हो गई थी।

शासन, प्रशासन द्वारा पैदल मार्ग और केदारनाथ में फंसे व रुके यात्रियों व स्थानीय लोगों के लिए विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया गया, जिसमें पांच दिन में 11775 यात्री व स्थानीय को सुरक्षित निकाला गया है। इन यात्रियों में 3347 को हेलिकॉप्टर से, 7597 को पैदल मार्ग से और 708 को भीमबली-लिनचोली-चौमासी मार्ग से रेस्क्यू किया गया। खास बात यह रही कि भारत सरकार ने भी रेस्क्यू के लिए सेना का एमआई-17 और चिनूक हेलिकॉप्टर भेजा, साथ ही अन्य मदद भी की।

शासन के अनुसार, सोमवार को केदारनाथ पैदल मार्ग का रेस्क्यू पूरा कर दिया गया है। मंगलवार से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की मरम्मत का काम किया जाएगा। इधर, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ योगेंद्र सिंह ने बताया कि जो 50 यात्री धाम में हैं, वह अपनी स्वेच्छा से रुके हैं।

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