भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। पेरिस ओलंपिक के बाद इस सप्ताह पैरालंपिक का आयोजन होने जा रहा है। टोक्यो पैरालंपिक में रुद्रपुर निवासी मनोज सरकार ने कांस्य पदक जीता तो प्रदेश के कई दिव्यांग खिलाड़ियों की उम्मीदों को पंख लग गए लेकिन सुविधाओं की बैशाखी के अभाव में अब उनके सपने लड़खड़ाने लगे हैं।
रुद्रपुर के स्पोट्र्स स्टेडियम का नाम तो पैरा शटलर मनोज सरकार के नाम पर कर दिया गया लेकिन यहां दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए सुविधा नहीं है। आज तक न तो उन्हें एक अदद कोच मिला और न उनके लिए हॉस्टल की कोई व्यवस्था है। ऐसे में पैरा खिलाड़ी बड़े शहरों का रुख करने के लिए मजबूर हैं। पैरालंपिक पदक विजेता मनोज सरकार खुद लखनऊ में प्रशिक्षण ले रहे हैं। रवि पाल को भी रुद्रपुर छोड़कर दिल्ली जाना पड़ा। खिलाड़ियों का कहना है कि जब वे देश के लिए पदक जीतते हैं तो उनकी वाहवाही तो होती है लेकिन उन्हें सुविधाएं देने के प्रयास नहीं किए जाते। आज आलम यह है कि अधिकतर खिलाड़ियों ने खेल से मुंह मोड़ लिया तो कुछ ने दूसरे प्रदेश की राह पकड़ ली है।
सीएम उदीयमान खिलाड़ी योजना में दिव्यांग खिलाड़ियों को भी शामिल कर प्रोत्साहन राशि दी जाए। खेल हॉस्टल में दिव्यांगों के लिए प्रशिक्षण और प्रशिक्षक की सुविधा मिले। सत्यप्रकाश, पैरा खिलाड़ी
दिव्यांग खिलाड़ियों की सबसे बड़ी जरूरत स्थायी नौकरी है। हम भी विदेशों में इस देश के लिए खेलते हैं परंतु अन्य खिलाड़ियों की तरह हमें उचित सम्मान नहीं मिलता। प्रेमा विश्वास, पैरा खिलाड़ी।
सबसे जरूरी है कोच की नियुक्ति बिना कोच के कोई खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ सकता। दिव्यांग खिलाड़ियों को ठहरने के लिए कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। निर्मला मेहता, पैरा खिलाड़ी
सुविधा और सहायता नहीं मिलने के कारण मैं एक वर्ष पहले खेल छोड़ चुका हूं। पैरा खिलाड़ियों को कोच, मैदान, वित्तीय सहायता खेल सामग्री की जरूरत है। धनसिंह कोरंगा, पैरा खिलाड़ी




