भोंपूराम खबरी। पंतनगर इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च इन ड्राई एरियाज सिहोर भोपाल में दो से चार सितंबर को अखिल भारतीय रबी दलहन परियोजना की वार्षिक बैठक हुई।
बैठक में पंतनगर विवि की ओर से विकसित रवी दलहनों की तीन प्रजातियों को किसानों के उगाने के लिए जारी करने का निर्णय लिया गया। ये निर्णय आईसीएआर के उप महानिदेशक डॉ. टीआर शर्मा की अध्यक्षता में हुई प्रजाति विमोचन समिति की बैठक में हुआ था।
इस वर्ष विभिन्न रवी दलहनी किस्मों की देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों एवं आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों की जिन सात प्रजातियों को जारी करने का निर्णय लिया।
गया, उनमें से तीन प्रजातियां पंत मसूर – 16, पंत मटर-509 एवं पंत मटर-517 पंत विवि से विकसित हुई हैं।
निदेशक शोध डॉ. एएस नैन ने बताया कि यह विवि न केवल दलहनों की उन्नत प्रजातियां विकसित करने में अव्वल है, बल्कि इन प्रजातियों के पर्याप्त मात्रा में प्रजनक बीजों को उत्पादित करने में भी अग्रणी है।
परियोजना समन्वयक डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि रबी दलहनों की इस वार्षिक बैठक में चिह्नित पंत मसूर 16 प्रजाति को देश के उत्तरी पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र, असम एवं अन्य उत्तरी पूर्वी राज्यों उगाने की संस्तुति की गई है।
पंत मटर- 517 को देश के उत्तर-पश्चिमी राज्यों जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान एवं जम्मू संभाग और पंत मटर- 509 को उत्तरी-पूर्वी राज्यों जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल में उगाने की संस्तुत की गई है।
पंतनगर विवि ने विकसित कीं 70 से अधिक प्रजातियां: कुलपति… कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने विवि की प्रजातियों के चयन पर हर्ष जताया और वैज्ञानिकों डॉ. आरके पंवार, डॉ. एसके वर्मा व डॉ. अंजू अरोरा सहित परियोजना के सभी कर्मियों को बधाई दी। डॉ. चौहान ने बताया कि इस विवि से अब तक विभिन्न दलहनों की 70 से अधिक प्रजातियां देश के विभिन्न भागों के लिए विकसित की जा चुकी हैं। बताया कि सरकार ने 2027 तक देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है।




