भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। उत्तराखंड किसान आयोग के उपाध्यक्ष राजपाल सिंह और जिलाधिकारी उदयराज सिंह की मौजूदगी में जिले के किसान संगठनों से जुड़े करीब तीन सौ किसानों ने तराई में गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताई। साथ ही ग्रीष्मकालीन धान की फसल न लेने और इसके बदले में मक्के व गन्ने की खेती अपनाने का संकल्प लिया। किसानों के साथ ही अधिकारियों के चेहरे पर काफी उत्साह दिखा कि गर्मी में धान की फसल की जगह वैकल्पिक फसल लेने के शासन प्रशासन के प्रयास रंग लाने लगा है।
डीएम उदयराज ने शुक्रवार देर शाम कलक्ट्रेट सभागार में किसानों के साथ बैठक कर गर्मी में धान की फसल के वैकल्पिक फसल लेने पर गहन मंथन किया। किसानों व अधिकारियों ने कहा कि गर्मी में धान की फसल लेने से भूजल स्तर नीचे खिसकता ही है, अधिक खाद व कीटनाशक प्रयोग से पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है। मृदा की उर्वरा शक्ति भी कम होती जा रही है। इस फसल के विकल्प में गन्ने व मक्के की खेती को किसान अपना सकते हैं।
यह फसल फायदे की है। इन दोनों फसलों से मृदा की गुणवत्ता बनी रहेगी और पर्यावरण भी प्रभावित नहीं होगा। किसान विकास क्लब के प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा ने मक्के के रेट बढ़ाने, मार्केट की व्यवस्था करने की मांग की। डीएम ने किसानों की समस्याएं सुनी और उनके निस्तारण कराने का भरोसा दिलाया। किसानों को गर्मी में मक्के की खेती करने की शपथ दिलाई। इस मौके पर सीडीओ मनीष कुमार, एडीएम प्रशासन पंकज उपाध्याय, भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता, जसवीर सिंह, चौधरी किशन सिंह आदि मौजूद रहे।




