Friday, September 4, 2026

तिब्बत पैटर्न का भूकंप मचाएगा महाविनाश, वैज्ञानिक शोध में बड़ा खुलासा

Share

Advertisement

भोंपूराम खबरी। तिब्बत में मंगलवार सुबह 7.1 तीव्रता वाले भूकंप ने बड़ी तबाही मचा दी थी। उस भूकंप में सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। वहां चारों ओर तबाही का मंजर दिख रहा था। उत्तराखंड के वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में भूकंप के बदले पैटर्न को लेकर जो ताजा खुलासा हुआ है, वह काफी चिंताजनक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक आमतौर पर भूकंप की तरंगें पूर्व से पश्चिम की ओर जाती हैं। लेकिन तिब्बत में आए भूकंप की तरंगें उत्तर से दक्षिण की ओर गईं। वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी रीजन में दक्षिण की ओर आबादी ज्यादा होने के कारण इस पैटर्न के भूकंप अत्यंत विनाश कर सकते हैं। 50 साल बाद आए इस प्रकार के पैटर्न वाला भूकंप चिंता का विषय बन गया है। लिहाजा वैज्ञानिकों ने इस प्रकार के भूकंपों को लेकर अधिक जागरुकता और सतर्कता अपनाने की सलाह दी है।

फिर जल्द आ सकता है ऐसा भूकंप

वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार के मुताबिक, इस तीव्रता का यह भूकंप यदि इसी पैटर्न पर भारतीय हिमालय क्षेत्र में आता तो उसका नुकसान अधिक होता। तिब्बत क्षेत्र में आबादी कम होने की वजह से नुकसान भी कम हुआ। तिब्बत के मुकाबले भारतीय हिमालयी बेल्ट में अधिक आबादी और अधिक निर्माण हैं। हिमालय श्रंखलाओं के आर्क का विस्तार पूर्व से पश्चिम दिशा को है। हिमालय के भूगर्भ में इंडियन-यूरेशियन प्लेट की टेक्टोनिक बाउंड्री 25 से 30 किलोमीटर गहराई पर है, जिसमें इस समय रिसेटलमेंट चल रहा है। वैज्ञानिक मानते हैं कि अगले दो-तीन माह तक इस स्तर के भूकंप आए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

1975 में किन्नौर में आया था ऐसा भूकंप

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के अध्ययन में तिब्बत के ताजा भूकंप का पैटर्न हिमालय के बाकी भूकंपों के मैकेनिज्म से कुछ अलग दिखा। ‘मैकेनिज्म’ अर्थ भूकंप के कारणों और प्रक्रिया से है। मसलन भूकंप के लिए जिम्मेदार टेक्टोनिक प्लेट की गति और उनके बीच की जटिलताएं। वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले दो दिनों में भूकंप की दो गतिविधियों को छोड़कर ज्यादातर हलचल 05 से 15 किमी की गहराई में हुई हैं। तिब्बती क्षेत्र में भूकंप की ताजा गतिविधि उत्तर से दक्षिण की ओर पाई गई है। किन्नौर में 1975 में आए 6.8 तीव्रता के भूकंप की तरंगें उत्तर से दक्षिण दिशा में फैली थीं, जो कौरिक चांगो फॉल्ट जोन की दिशा से मेल खाती हैं। यह इलाका तिब्बत की सीमा से लगता हुआ है, जो इसे भूकंप के लिए अधिक संवेदनशील बनाता है।

Advertisement
Advertisement

Read more

Local News

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.