भोंपूराम खबरी। एमपी के छतरपुर में सोमवार को स्कूल के पहले ही दिन 12वीं कक्षा के छात्र सार्थक टिकरिया की मौत हार्ट अटैक से हो गई। सार्थक के परिवार ने मौत के बाद कॉर्निया दान करने का फैसला किया है। वहीं, सार्थक के पिता आलोक टिकरिया ने कहा कि उन्होंने ट्रैफिक जाम से निपटने और लड़के को जिला अस्पताल की दूसरी मंजिल पर स्थित आईसीयू तक पहुंचाने में अपना कीमती समय बर्बाद कर दिया। वहीं, सार्थक के पिता ने कहा कि हम उसे यादों में जिंदा रखना चाहते हैं, इसलिए आंखें दान कर दीं।
उन्होंने हमारे बताया कि मैंने अपने बेटे को खो दिया है लेकिन मैं अधिकारियों से यातायात की स्थिति में सुधार लाने और गंभीर मरीजों के लिए लिफ्ट आरक्षित करने या आईसीयू को ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट करने की अपील करता हूं। टिकरिया ने रोते हुए कहा कि मेरे बेटे ने कहा कि मुझे बचा लो। मृतक छात्र के पिता ने कहा कि सार्थक तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था और उसे कभी भी स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं थी। टिकरिया ने कहा कि हम एक संयुक्त परिवार में रहते हैं, 14 लोग और बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि वह पूरे दिन इधर-उधर भागता रहता था। कभी किसी बात की शिकायत नहीं करता था।
गौरतलब है कि सार्थक की जब तबीयत बिगड़ी तो वह स्कूल की दूसरी मंजिल पर था। वहां से जिला अस्पताल की दूरी डेढ़ किमी है। ट्रैफिक के कारण वैकल्पिक रास्ते का सहारा लेना पड़ा, जिसकी वजह से 10 मिनट का समय अधिक खर्च करना पड़ा। अस्पताल में डॉक्टरों ने हमें आईसीयू में ले जाने को कहा जो दूसरी मंजिल पर है। अस्पताल में चार लिफ्ट हैं लेकिन कोई भी आईसीयू या गंभीर रोगियों के लिए समर्पित नहीं है। हमें आईसीयू तक पहुंचने के लिए लगभग 10 मिनट इंतजार करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि उनके 20 कीमती मिनट बर्बाद हो गए। हम सार्थक की यादों को जिंदा रखना चाहते हैं, इसलिए हमने उसकी आंखें दान कर दीं। पिता ने कहा कि कुछ महीने पहले वह रक्तदान करना चाहता था। नाबालिग होने की वजह से अनुमति नहीं दी गई। टिकरिया ने कहा कि वह एमपी बोर्ड से पढ़ाई करना चाहता था इसलिए हमने उसे एक नए स्कूल में एडमिशन करवा दिया और सोमवार को उसका पहला दिन था। हमें सुबह 9.15 बजे के आसपास स्कूल से फोन आया और 9.45 बजे अस्पताल पहुंच गए।




