Friday, September 4, 2026

खुल गए स्कूल, बच्चों में उत्साह, अभिभावकों में चिंता

Share

Advertisement

भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर।  आखिरकार उत्तराखंड में  स्कूल खुल गए है। जनपद मुख्यालय पर स्कूल खुलने से छात्र-छात्राओं के चेहरे खिल उठे। हालाँकि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए कई लोगों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाये।

राज्य सरकार के निर्देशानुसार कक्षा 9 से 12 तक कि कक्षाओं को एक बार फिर से खोला गया है। शासकीय आदेश के बाद सरकारी स्कूलों के साथ-साथ कई निजी स्कूलों को भी खोल दिया गया है। लेकिन कोरोना के खौफ के चलते अभी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बेहद कम है। ज्यादातर अभिभावक अभी भी कोरोना की स्थिति को देखते हुए खतरा लेने के मूड में नहीं है। लेकिन फिर भी बच्चे स्कूल आए और कई जगहों पर बच्चों मैं उत्साह भी देखा गया है। स्कूलों में कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए पूरे स्कूल में सैनीटाइजेशन किया गया। सरकार के निर्देश के अनुसार जो बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे हैं उनके लिए भी स्कूल द्वारा व्यवस्था की गई है स्कूलों के शिक्षक उन्हें ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। वहीं 16 अगस्त से 6 से 8 वीं तक के विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य भी चलाया जाएगा। फिलहाल ज्यादातर विद्यालयों में अभिभावकों से छात्र छात्राओं के प्रवेश हेतु सहमति पत्र लिए जा रहे है।

खुल गए स्कूल, बच्चों में उत्साह, अभिभावकों में चिंता

सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य कैलाश चंद्र ने बताया कि सोमवार को केवल अभिभावकों को बुलाया गया है। ताकि बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए सहमति पत्र में हस्ताक्षर कराए जा सके। उन्होंने बताया कि 500 में से करीब 300 छात्र छात्राओं के अभिभावकों ने सहमति पत्र भरकर हस्ताक्षर कर दिए है। जनता इंटर कालेज में अभिभावकों के साथ विद्यार्थियों की चहल पहल भी देखने को मिली। महीनों बाद स्कूल आकर विद्यार्थियों के चेहरे पर रौनक साफ देखी जा सकती है। जनता इंटर कॉलेज के उप प्रधानचार्य संजय आर्या ने बताया कि विद्यालय में दो पालियों में कक्षा संपन्न कराई जाएगी। साथ ही विद्यालय में थर्मल मशीन का प्रयोग भी किया जाएगा।

काफी लंबे समय बाद विद्यालय आकर खुद को तरोताज़ा महसूस कर रहे है। घर में ऑनलाइन कक्षा की अपेक्षा कक्षा में पढ़ाई करना बेहद सुखद है। स्कूल में सहपाठियों के बीच पहुंचकर पढाई करने का अलग ही आनंद है। घर पर अकेले ऑनलाइन पढाई करने से तनाव बढ़ रहा था। —-आदर्श मिश्रा, कक्षा 12वीं के छात्र

खुल गए स्कूल, बच्चों में उत्साह, अभिभावकों में चिंता

कोरोना ने काफी कुछ बदल दिया है, अधिकांश लोग बैठे बैठे ही काम करना चाह रहे है। उन्होंने कहा कि स्कूल में आना इसी आलस्य पर एक जीत है। स्कूल पहुंचकर अपने अध्यक्पकों से साक्षात् पढ़ना ही असल विद्या अर्जन है। घर में तो मोबाइल पर ऑनलाइन क्लास होती थी। इससे आँखों पर भी बुरा असर पड़ा है। साथ ही अब खेलने को भी मिल सकेगा। —-दीपक कुमार, कक्षा दसवीं के छात्र

कोरोना की तीसरी संभावित लहर के जल्द आने का संकेत देश व दुनिया के वैज्ञानिक दे चुके हैं। हम अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे। सरकार ने ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प खुला रखा है। जैसे बीते डेढ़ साल बीते हैं वैसे कुछ समय और काट लेंगे। लेकिन कोरोना महामारी के खत्म होने पर ही बच्चों को स्कूल भेजेंगे। —-वीके मिश्रा , अभिभावक

Advertisement
Advertisement

Read more

Local News

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.