Friday, September 4, 2026

केरल के पूर्व सीएम ओमान चांडी का हुआ निधन

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भोंपूराम खबरी,तिरुवनंतपुरम। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता ओमान चांडी (Oommen Chandy) का लंबी बीमारी के कारण सुबह बेंगलुरु के चिन्मय अस्पताल (Chinmaya Hospital) में निधन हो गया। वे 80 साल के थे। ओमन चांडी के पुत्र चांडी ओम्मेन ने एक फेसबुक पोस्ट में अपने पिता के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, “अप्पा का निधन हो गया है।” पूर्व मुख्यमंत्री पिछले कई महीनों से बेंगलुरु में इलाज करा रहे थे।

ओमन चांडी अपने पीछे पत्नी मरियम्मा उम्मेन, पुत्रियां अचू ओम्मन और मारिया ओम्मन और पुत्र चांडी ओम्मन को छोड़ गए हैं। दो बार मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य के लोगों की सेवा करने वाले ओमन चांडी केरल में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय चेहरा थे। विधायक के रूप में 50 साल पूरा करने वाले ओमन चांडी 1970 से कोट्टायम जिले के अपने गृह नगर पुथुपल्ली सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। चांडी ने कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य और आंध्र प्रदेश के अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) प्रभारी के रूप में भी कार्य किया था। वह 1967-69 के दौरान सेंट जॉर्ज हाई स्कूल, पुथुपल्ली में केरल छात्र संघ (केएसयू) के इकाई अध्यक्ष और संगठन के राज्य अध्यक्ष भी रहे थे। साल 1970 में उन्हें राज्य युवा कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।

चांडी ने विश्वविद्यालय की प्रारंभिक पढ़ाई सी.एम.एस. कॉलेज, कोट्टायम से और सेंट बर्चमैन्स कॉलेज, चंगनास्सेरी से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि हासिल की थी। उन्होंने एर्नाकुलम के सरकारी लॉ कॉलेज से कानून में स्नातक की डिग्री (LLB) भी हासिल की थी। वह 11 अप्रैल, 1977 से 25 अप्रैल, 1977 तक के. करुणाकरण के शासनकाल में श्रम मंत्री रहे और 27 अक्टूबर, 1978 तक ए.के. एंटनी के शासनकाल में उसी विभाग को संभालते रहे। अट्ठाइस दिसंबर, 1981 से 17 मार्च, 1982 तक के करुणाकरण दूसरे शासनकाल में उन्होंने गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाल। फिर वे 2 जुलाई, 1991 को के. करुणाकरण के चौथे शासनकाल में मंत्री बने। इस दौरान उन्हें वित्त मंत्रालय का जिम्मा मिला था, लेकिन 22 जून 1994 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

साल 2004 में, लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के खराब प्रदर्शन और गुटीय राजनीति के कारण मुख्यमंत्री पद से एंटनी के इस्तीफे के बाद चांडी थोड़े समय (अगस्त 2004 से मई 2006) के लिए उनके उत्तराधिकारी बने। चांडी 12वीं केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। उनके नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने 2009 के लोकसभा चुनाव में केरल की 20 संसदीय सीटों में से 16 पर जीत हासिल की। इसके बाद 2010 के स्थानीय निकाय चुनाव में भी कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया। केरल की राजनीति के इतिहास में, यह पहली बार था कि यूडीएफ को स्थानीय निकाय चुनावों में बढ़त मिली थी। चांडी ने 2011 के विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से जीत हासिल की और दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ उम्मीदवारों ने एलडीएफ (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) के 68 के मुकाबले 72 सीटों पर जीत हासिल की थी।

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