भोंपूराम खबरी। कहते हैं ना लालच बुरी बला होती है और लालच के चक्कर में फस कर लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है पर चमोली जनपद के ग्राम पंचायत धारकोट में तो लाल-लाल पके हुए काफल खाने के चक्कर में पेड़ से गिरकर एक भारी-भरकम मादा भालू की ही मौत हो गई… दरअसल बीते 30 मई को चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत धारकोट के मैठापानी तोक में वनविभाग के कर्मचारियों को एक मादा भालू के मरे होने की सूचना मिली….
सूचना मिलने के बाद वनकर्मी मौके पर पहुंचे और भालू के शव को कब्जे में लेकर रैंज कार्यालय नारायणबगड़ ले आए और 31 मई को पोस्टमार्टम कराने के बाद भालू के शव का वन कर्मियों ने अंतिम संस्कार कर दिया…उधर पश्चिमी पिंडर रैंज के वनक्षेत्राधिकारी वीएस परमार ने भालू की मौत के मामले में यह आशंका जताई है कि 4 वर्षीय मादा भालू की काफल के पेड़ से नीचे सडक़ पर गिर जाने से मौत हुई होगी क्योंकि मौके पर काफल के पेड़ की टहनी भी टूटी हुई थी…
उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में होने वाला जंगली फल-काफल)
हम आपको बता दें कि उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों के जंगली क्षेत्रों में होने वाला जंगली फल काफल भालू काफी पसंदीदा फल है और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार काफल का स्वाद लेने के चक्कर में काफल के पेड़ पर कमजोर टहनियों पर चढ़ने की वजह से इस भारी-भरकम मादा भालू की पेड़ से गिरकर मौत हुई होगी




