भोंपूराम खबरी। आजादी के बाद से नैनीताल संसदीय सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। अब तक के 17 आम चुनाव में 11 बार कांग्रेस तो जीती, लेकिन उत्तराखंड गठन के एक दशक बाद कांग्रेस इस सीट कमजोर हो गई। 2014 की मोदी लहर में कांग्रेस हार गई। 2019 के चुनाव में भी करारी शिकस्त खानी पड़ी। इस बार भाजपा हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में है तो कांग्रेस के लिए सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है।
आजादी के बाद पहले चुनाव वर्ष 1951-52 और 1957 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चंद्रदत 1962 से 1977 तक कांग्रेस के कद्दावर नेता कृष्ण चंद्र पंत ने हैट्रिक लगाई 1977 में यह मीट भारतीय लोक दल के भारत भूषण को फिर अपने पाले में करने के लिए 1980 के लोकसभा में पंडित नारायण दत्त तिवारी को भारत भूषण के सामने उतारा। इसके बाद यह सीट फिर कांग्रेस की झोली में आ गई।
रुद्रपुर। नैनीताल लोकसभा सीट पर कांग्रेस के सांसद रहे कैसी पंत के अलावा आज तक किसी भी प्रत्याशी की हैट्रिक नहीं बन सकी। यहां तक कि कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री स्व. पंडित नारायण दत्त तिवारी चार बार चुनाव लड़े। इनमें तीन चुनाव जीते भी लेकिन हैट्रिक का रिकॉर्ड नहीं बना सके केसी सिंह बार चुनाव जीत गए तीसरे चुनाव में जनता ने उन्हें हरा दिया। इससे कैसी की हैट्रिक।
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के प्रति सहानुभूति पर एनडी तिवारी के करीबी सत् यहां से चुनाव लड़े और जोत गए। 1989 में जनता दल से महेंद्र सिंह चुनाव 1991 के आम चुनाव में एनडी तिवारी को म लहर के कारण भाजपा के बलराज पासी ने एनडी तिवारी को हरा दिया। 1996 के आम चुनाव में एनडी तिवारी सांसद बने 1998 में हुए चुनावों में इलाज के टिकट जती। 1999 में फिर एनडी तिवारी ने सीट से जीत हासिल की।
2002 में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार बनी तो एनडी तिवारी को सीएम बना दिया गया लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए तो फिर कांग्रेस के खाते में गई यहाँ से महेंद्रपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी। 2004 से 2014 तक केसी सिंह कांग्रेस से लगातार दो बार सांसद बने।
2014 के चुनाव में मोदी लहर में भाजपा के भगत सिंह की जोत का रथ रोका 2019 में भाजपा के अजय भट्ट ने कांग्रेस के हरीश रावत को करारी शिकस्त दी। अब फिर से भाजपा के अजय भट्ट मैदान में है, वहीं कांग्रेस से प्रकाश जोशी ताल ठोक रहे हैं। इसके अलावा सहित आठ अन्य प्रत्याशी भी मैदान में है।




