भोंपूराम खबरी। उत्तराखंड के चार गांवों में अचानक लॉकडाउन लगा दिया गया है। चार दिन तक गांवों से ने तो कोई बाहर जा सकेगा और न बाहर से कोई गांव में प्रवेश कर पाएगा। गांव की सीमाओं की मंत्रों से नाकेबंदी की गई है।
ये अनूठी परंपरा उत्तराखंड के चमोली जिले के उर्गम घाटी के चार गांवों में निभाई जा रही है। यहां पर गांवों की खुशहाली, फसल की बेहतर पैदावार और ग्रामीणों की उन्नति के लिए अनुष्ठान चल रहा है। ये अनुष्ठान हर 60 साल में एक बार संपन्न किया जाता है। इससे पहले करीब वर्ष 1964 में गांव में ये अनुष्ठान संपन्न हुआ था। अनुष्ठान निर्विघ्न चले इसके लिए गांव की सीमाओं पर वेदमंत्रों और पूजे हुए अक्षतों से लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है।
अनुष्ठान के बाद खुलेगा लॉकडाउन
पुरानी परंपराओं के अनुसार अनुष्ठान संपन्न कराने तक गांव से कोई भी व्यक्ति बाहर नहीं जा सकता है। इतने ही दिन बाहर से कोई व्यक्ति गांव में प्रवेश भी नहीं कर पाता है। इसी को देखते हुए चार गांवों में परंपराओं के अनुसार लॉकडाउन लगाया गया है। अनुष्ठान संपन्न होने के बाद ही लॉकडाउन खुलेगा।
भूमियाल देवता का चल रहा पूजन
उर्गम घाटी के डुंग्री, बरोसी और जोशीमठ क्षेत्र के सलूड़ व डुंग्रा गांव के ये अनूठा अनुष्ठान चल रहा है। समस्त ग्रामीण भूमियाल देवता की भक्ति में लीन चल रहे हैं। ये अनुष्ठान दस जनवरी की दोपहर से ही शुरू हो गया था। अनुष्ठान शुरू होने से पहले ही चारों गांवों की सीमाओं पर मंत्रों से नाकेबंदी कर दी गई थी।
गांवों में वाहनों की आवाजाही भी ठप
अनुष्ठान के चलते लगे लॉकडाउन में गांव में न केवल पैदल बल्कि वाहनों से भी आवाजाही बंद चल रही है। अनुष्ठान आज यानी 13 जनवरी को पूरा होगा। उसके बाद ही गांव की सीमाएं आवाजाही के लिए खुल पाएंगीं।




