भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। रुद्रपुर में एक मालदार आसामी द्वारा चोरी की मोटरें खरीदे जाने के मामले का पटाक्षेप हो गया है। लगभग पचास लाख के माल के लिए तेरह लाख रुपए में आखिरकार समझौता हुआ। इस पंचायत में भाजपा जनप्रतिनिधि के रिश्तेदार व व्यापार मंडल के कद्दावर पदाधिकारी मौजूद रहे। यहां यह भी गौरतलब है कि आपके अपने वेब पोर्टल भोंपूराम खबरी की बीते दिवस की रिपोर्टिंग के विपरीत आरोपी व्यापारी गल्ला मंडी का आढ़ती नहीं बल्कि भूरा रानी मार्ग पर सैनिटरी स्टोर चलाने वाला ट्रेडर है। जिसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं।
भोंपूराम खबरी के विश्वसनीय सूत्रों और रिपोर्टर्स की संयुक्त विवेचना में ये पता लगा कि इस पूरे षड्यंत्र में गल्ला मंडी रोड स्थित एक मशीनरी स्टोर के स्वामी का ड्राइवर सूत्रधार था। उसी के बरगलाने पर दुकान के दो नौकर नमकहराम हुए और अपने मालिक को ही आर्थिक चोट देनी शुरू कर दी।
दुकान से माल चोरी कर यह क्षेत्र के भाजपा जनप्रतिनिधी के रिश्तेदार को बेचते थे। यही नहीं, इस लेनदेन का भुगतान डिजिटल माध्यम से होता था और यही इस पूरे किस्से के खुलासे का कारण बना। घटनाक्रम यूं रहा कि दुकान के दो नौकर माल चुराकर इस ड्राइवर को देते थे और वो आगे भूरा रानी स्थित शोरूम में भाजपा जनप्रतिनिधि के रिश्तेदार को औने पौने दाम में बेच देता था। नौकरों को कमीशन मिलता था और वह बीते एक साल से बदस्तूर यह चोरी कर रहे थे। बीते दिनों मशीनरी स्टोर के स्वामी को शाहजहांपुर से एक ऑर्डर मिला जिसमे अमूमन कम प्रयोग होने वाली मोटरें बेची जानी थी। दुकान स्वामी ने कुल पांच मोटर स्टॉक में रखी थी लेकिन वो ऑर्डर दिए जाने पर सप्लाई पूरा करने को नहीं मिली। शक होने पर सख्ती से पूछताछ की गई तो दोनों नौकर फरार हो गए लेकिन चोर ड्राइवर अपने मालिकों के हत्थे चढ़ गया। उसके कुबूलनामे पर चोरी का माल खरीदने वाले भूरा रानी स्थित दुकान के स्वामी से जब बात की गई तो वह मुकर गया। लेकिन ड्राइवर के फोन पर हुए डिजिटल ट्रांजेक्शन ने सारी पोल खोल दी।
इसके बाद इस चोर दुकानदार के रिश्तेदार व भाजपा के कद्दावर जनप्रतिनिधि के नजदीकी और चुनाव से कुछ समय पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेता हरकत में आए।उन्होंने भाजपाई जनप्रतिनिधि के रसूख का प्रयोग करते हुए एफआईआर नहीं होने दी और पीड़ित पक्ष को पंचायत के लिए बाध्य किया।
इसके बाद पीड़ित पक्ष के समर्थन में उद्योग व्यापार मंडल खड़ा हो गया। बात टेबल टॉक तक पहुंची तो जनप्रतिनिधी के रिश्तेदार ने पर्याप्त रकम देने से मना कर दिया। पहले 18 लाख फिर 17 लाख से शुरू होकर बात अंततः 13 लाख के सेटलमेंट पर खत्म हुई।
अलबत्ता भूलभोगी दुकानदार को नुकसान पचास लाख का हुआ था लेकिन उसने भी भागते भूत की लंगोटी पकड़ना उचित समझा क्योंकि मामला सत्तारूढ़ भाजपा के जनप्रतिनिधी से जुड़ा था।
अब इस मामले में शहर में कयासों के दौर चल रहे हैं। असलियत सामने आ चुकी है लेकिन हैरानी की बात यह है कि मंदिर के बाहर से चप्पल चोरी होने की जानकारी रखने का दावा करने वाली उधम सिंह नगर पुलिस इस मामले में बेखबर है, जिसका हमें तो विश्वास नहीं है।
अंत में आपका अपना वेब पोर्टल भोंपूराम खबरी खेद प्रकट करता है कि कल की खबर में हमने चोर को गल्ला मंडी का आढ़ती बता दिया था जबकि वो भूरा रानी रोड स्थित एक सैनिटरी स्टोर स्वामी था।




