भोंपूराम खबरी,नैनीताल। सर्दियों के बढ़ते प्रकोप के कारण लोग खुद को ठंड से बचाव करने के लिये तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं, कोई अलाव जला रहा है तो कोई हीटर आदि के माध्यम से खुद का बचाव कर रहा है। लेकिन कई बार यह तरीके खतरनाक भी साबित हो जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है नैनीताल में यहां अंगठी घर में अंगीठी जलाकर रखी गई, लेकिन अंगीठी से निकलने वाली गैस के कारण दंपत्ति बेहोश हो गये। साथ ही इतना ही नहीं महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। मामले में मिली जानकारी के अनुसार तल्लीताल के रहने वाले ललित ने शनिवार रात कमरे में अंगीठी जलाई थी। दोनों पति-पत्नि खाना खाने के बाद अपने कमरे में ही सो गये। लेकिन देर रात एकाएक ललित का सिर चकराने लगा। जिसपर उसने इसकी सूचना फोन करके अपने पड़ोसियो को दी। जिसपर पड़ोसियों द्वारा उन्हें इलाज के लिये बीडी पांडे हॉस्पिटल लाया गया। जहां दोनों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा था ।
रविवार सुबह होश में आने के बाद चिकित्सकों को महिला के गर्भवती होने की जानकारी मिली। अल्ट्रासाउंड कराया गया तो गर्भ में पल रहे भ्रूण में हलचल हो रही थी, मगर देर शाम जांच के दौरान हलचल बंद हो गयी। पीएमएस डॉ एलएमएस रावत ने गर्भ में पल रहे भ्रूण की मौत की पुष्टि की है। बंद कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी को जलाने से ऑक्सीजन का स्तर घटता है। इसके साथ ही कमरे में मोनोऑक्साइड का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे मनुष्य के दिमाग पर असर डालता है। दिमाग पर मोनोऑक्साइड का असर पूरे शरीर में होता है और सोया हुआ इंसान बेहोश हो जाता है। बंद कमरे में अंगीठी को रखा जाता है तो कार्बन मोनोऑक्साइड सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचता है. मोनोऑक्साइड के फेफड़ों तक पहुंचने के बाद ये सीधा खून में मिल जाता है, जिससे हीमोग्लोबिन का लेवल घट जाता है और इंसान की मौत हो जाती है।




