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Sunday, May 26, 2024

सात दिन में अडानी ग्रुप को 9 लाख करोड़ का नुकसान, अमेरिका से भी झटका.. आखिर कब थमेगी गिरावट?

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भोंपूराम खबरी। हिंडनबर्ग के खुलासे के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में शुरू हुआ गिरावट का सिलसिला पूरे सप्ताह भर जारी रहा है. इस दौरान अडानी ग्रुप की कंपनियों के मार्केट कैप में भारी गिरावट आई है. निवेशक हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं. आखिर अडानी ग्रुप के शेयर कब वापसी करेंगे।

अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी ग्रुप (Adani Group) की कंपनियों के शेयरों में शुरू हुई गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. हर रोज टूटते शेयरों की वजह से अडानी ग्रुप की कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन (M-cap) लगातार कम हो रहा है. इस वजह से पिछले सात कारोबारी सत्रों में अडानी ग्रुप को 9 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप गंवाना पड़ा है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप का मार्केट कैपिटलाइजेशन 10 लाख करोड़ कम हुआ है। 24 जनवरी 2023 को अडानी ग्रुप का मार्केट कैप 19.2 लाख करोड़ रुपये था।

अडानी पावर, अडानी टोटल गैस, अडानी विल्मर, अडानी ग्रीन, अडानी ट्रांसमिशन, अडानी पोर्ट्स, अडानी एंटरप्राइजेज, अंबुजा सीमेंट्स, एसीसी और एनडीटीवी को मिलाकर स्टॉक मार्केट में अडानी ग्रुप के कुल 10 शेयर लिस्टेड हैं. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद इन शेयरों में 50 फीसदी तक की गिरावट आई है।

अडानी टोटल गैस के शेयर इस अवधि के दौरान 3,885.45 रुपये से सबसे अधिक 51 फीसदी गिरकर 1901.65 रुपये पर आ गया है।  अडानी ग्रीन एनर्जी (40% नीचे), अडानी एंटरप्राइजेज ( 38% नीचे), अडानी ट्रांसमिशन (37% नीचे), अडानी पोर्ट्स और एसईजेड ( 35% नीचे ), अंबुजा सीमेंट्स ( 33% नीचे ), अडानी विल्मर (23% नीचे), अडानी पावर ( 22.5% नीचे), एसीसी (21% से नीचे) और एनडीटीवी (17% से नीचे) में भारी गिरावट आई है।

एसएंडपी डाउ जोंस इंडेक्स ने कहा कि अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 35 प्रतिशत तक गिर गए. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में अडानी ग्रुप को लेकर स्टॉक हेरफेर-अकाउंटिंग फ्रॉड समेत कई तरह के दावे किए गए हैं. इन तमाम आरोपों को लेकर के डाउ जोंस सस्टेनिबिलिटी इंडेक्स ने मीडिया स्टेकहोल्डर एनालिसिस के बाद कार्रवाई करते हुए अडानी की कंपनी को हटाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 7 फरवरी को इसे डाउ जोंस से हटा दिया जाएगा।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट 24 जनवरी को आई थी. इसके बाद से ही अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट का दौर शुरू हुआ था. हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अडानी ग्रुप की लिस्टेड सात कंपनियां ओवरवैल्यूड हैं. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अडानी समूह दशकों से स्टॉक हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग में लगा हुआ है. अडानी समूह ने हिंडनबर्ग पर कॉपी-पेस्ट करने का आरोप लगाया था. समूह ने कहा था कि या तो हिंडनबर्ग ने सही तरीके से रिसर्च नहीं किया है या फिर जनता को गुमराह करने के लिए उसने गलत तथ्य पेश किए हैं. 400 से अधिक पन्नों की प्रतिक्रिया में गौतम अडानी के नेतृत्व वाले समूह ने सभी आरोपों को भ्रामक बताया था।

बिजनेस टुडे में छपी एक खबर में ग्रीन पोर्टफोलियो रिसर्च हेड और सह-संस्थापक, अनुज जैन कहते हैं कि अडानी पैक ने हमेशा बहुत अधिक वैल्यूशन किया है और बार- बार इस पर संदेह जताया गया है. शेयर की कीमतों में गिरावट के बावजूद अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी ट्रांसमिशन, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी टोटल 3 डिजिट के PE पर कारोबार कर रहे हैं।

जैन का मानना है कि बहुत कम ओवरवैल्यूएशन को छोड़ना बाकी है वरना बाजार की ताकतों ने उन्हें अब उचित वैल्यूएशन पर ला दिया है. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये कंपनियां बहुत तेजी से विकास कर रही हैं और व्यापार मॉडल डिमांड और एन्युटी के लिए कमोबेश अयोग्य है. हम मानते हैं कि सबसे बुरा दौर लगभग हो गया है. हालांकि, एक शेयर जो दिलचस्प है वो है अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड

भारतीय मार्केट पर इसका असर

राइट रिसर्च के संस्थापक सोनम श्रीवास्तव ने कहा कि हालांकि अडानी ग्रुप के शेयरों का ओवरवैल्यूएशन कोई आश्चर्य की बात नहीं थी, लेकिन धोखाधड़ी और बाजार में हेरफेर के आरोप बहुत भयावह हैं. पिछले साल सोशल मीडिया पर इस बारे में अफवाहें उड़ी थीं, लेकिन नियामकों ने कभी कोई स्टैंड नहीं लिया और आरोप दब गए. श्रीवास्तव का मानना है कि हिंडनबर्ग द्वारा की गई। विस्तृत जांच एक रहस्य का खुलासा है और अडानी की कंपनियों के अस्पष्ट कॉरपोरेट प्रशासन के मुद्दों को दूर करके भारतीय बाजार में मदद करेगी।

 

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