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Tuesday, June 25, 2024

भगवान को गर्मी से बचाने के लिए भक्तों ने मंदिर में किए विशेष इंतजाम

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भोंपूराम खबरी। उत्तराखंड के मैदानी जनपदों में गर्मी काफी बढ़ चुकी है, गर्मी बढ़ने का असर सिर्फ आम इंसान, पशु पक्षी, पेड़-पौधों सभी पर असर दिखाई दे रहा हैं. इंसान की औकात क्या जब दुनिया बनाने वाले भगवान को गर्मी लग रही है! ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ऊधम सिंह नगर जनपद के कई मंदिरों में गर्मी की शुरुआत होने के बाद से भगवान को सूती के वस्त्र, ठंडे तासीर वाले फलों का भोग लगाया जा रहा है और मंदिर में 24 घंटे पंखे और कूलर की व्यवस्था मंदिर प्रशासन और भक्तों के द्वारा की जा रही हैं।

वेद प्रकाश,ऊधम सिंह नगर. उत्तराखंड के मैदानी जनपदों में गर्मी काफी बढ़ चुकी है, गर्मी बढ़ने का असर सिर्फ आम इंसान, पशु पक्षी, पेड़-पौधों सभी पर असर दिखाई दे रहा हैं. इंसान की औकात क्या जब दुनिया बनाने वाले भगवान को गर्मी लग रही है! ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ऊधम सिंह नगर जनपद के कई मंदिरों में गर्मी की शुरुआत होने के बाद से भगवान को सूती के वस्त्र, ठंडे तासीर वाले फलों का भोग लगाया जा रहा है और मंदिर में 24 घंटे पंखे और कूलर की व्यवस्था मंदिर प्रशासन और भक्तों के द्वारा की जा रही हैं.

ऊधम सिंह नगर जनपद के सनातन धर्म मंदिर कमेटी द्वारा भगवान को गर्मी से बचाने के लिए भगवान को सूती वस्त्र पहनाए जा रहें, और ठंडे तासीर वाले फलों का भोग लगाया जा रहा हैं. इसके साथ भगवान को गर्मी से बचाने के लिए मंदिर प्रशासन और भक्तों की तरफ से 24 घंटे पंखे और कूलर चलाया जा रहा है.

सनातन धर्म मंदिर कमेटी के कार्यक्रम प्रबंधक पंडित अरूणेश मिश्रा ने बताया कि हमेशा ही मन्दिर में भगवान को मौसम के अनुसार भोग लगाया जाता है अन्य व्यवस्थाएं भी मौसम के अनुसार परिवर्तित की जाती हैं. उन्होंने कहा कि इस बार अप्रैल की शुरुआत में अचानक ही गर्मी बढ़ने के बाद सनातन धर्म मंदिर कमेटी की तरफ से भगवान को सूती वस्त्र पहनाने शुरू कर दिये. ठंडे तासीर वाले फलों का भोग भगवान को लगाने लगें. इसके साथ ही मंदिर में 24 घंटे पंखा चलाने की व्यवस्था है और जल्द ही कूलर की व्यवस्था भी की जाएगी।

सनातन धर्म मंदिर कमेटी के कार्यालय प्रबंधक पंडित अरूणेश मिश्रा ने बताया कि हर बार मौसम बदलने के साथ साथ भोग और वस्त्र मौसम के हिसाब से पहनाए जाते हैं, इसकी व्यवस्था भक्तों और मंदिर कमेटी की तरफ से की जाती है. उन्होंने कहा कि ये भक्तों का भाव है कि मौसम में परिवर्तन के साथ जैसे खुद का खान-पान और अलग-अलग कपड़े पहनते हैं और रहन सहन बदलते हैं, वैसे ही भगवान के लिए व्यवस्था करते है।

 

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