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Thursday, July 18, 2024

करीब आ रहा है एक धूमकेतु, जुलाई में पहुंचेगा पृथ्वी के नजदीक

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भोंपूराम खबरी।

खास रहने वाला है जुलाई का महीना

जुलाई का महीना इस बार खास रहने वाला है। आसमान में अपनी चमक की अनुपम छाप छोड़ने वाला एक धूमकेतु हमारे करीब पहुंचने जा रहा है। जुलाई में वह हमारे सार्वाधिक नजदीक होगा। इस धूमकेतु का नाम सी /2021 टी 4 लेमन है। इन दिनों वह दक्षिणी आसमान की यात्रा कर रहा है। लंबी पूंछ के साथ नजर आने चमकदार धूमकेतु हमारे सौर मंडल के अभिन्न अंग हैं। चमकदार लंबी पूंछ के कारण इन्हें पुच्छल तारा भी कहा जाता है। हमारे नजदीक आने को लेकर यह धूमकेतु इन दिनों वैज्ञानिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रसिद्ध ब्रिटिश खगोलशास्त्री गाइ ओटवेल ने इस धूमकेतु को लेकर विशेष लेख भी लिखा है, जो विज्ञान पत्रिका के ताजा अंक में प्रकाशित हुआ है। धूमकेतु सी/2021 टी4 लेमन की खोज 7 अक्टूबर, 2021 को एरिजोना के टक्सन के उत्तर-पूर्व में माउंट लेमन ऑब्जर्वेटरी से हुई थी। तभी से यह वैज्ञानिकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अब पृथ्वी के करीब आने पर सबकी निगाहें इस धूमकेतु पर टिकी हुई है। फिलहाल इस धूमकेतु को दूरबीन की सहायता से देखा जा सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि पृथ्वी के करीब पहुंचने पर इसकी चमक बेहद बढ़ जाएगी और इसे नग्न आंखों से देखा जा सकेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह लंबी अवधि का धूमकेतु है। जिसे सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में हजारों वर्ष का सफर तय करना पढ़ता है। बहरहाल जैसे जैसे यह पृथ्वी के करीब पहुंचेगा, इसके बारे में अधिक जानकारी मिलने लगेगी। दुनिया की कई दूरबीनों की नजर इस पर जमी हुई है। वर्तमान में यह धूमकेतु सुबह के आकाश में 60 डिग्री दक्षिण में सूर्य से 1.75 एयू और पृथ्वी से 2 एयू (खगोलीय इकाई) दूरी पर है। 27 जून 2023 को हमसे इसकी दूरी 1 एयू रह जाएगी। 18 जुलाई को यह हमारे सबसे करीब होगा। तब इसकी दूरी 0.54 एयू रह जाएगी और तब यह यह सार्वाधिक चमकदार नजर आयेगा। तब संभवतः इसकी चमक परिमाण 8 या 7 तक तक पहुंच जाएगी। यानी तब हम इसे नग्न आंखों से निहार सकेंगे। इसके बाद 9 नवंबर को सूर्य के पीछे चला जाएगा।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के आउट रिच प्रभारी डा विरेंद्र यादव के अनुसार धूमकेतु आसमान सार्वाधिक आकर्षण रखने वाले ऑब्जेक्ट हैं। सम्भावना यह भी जाता है कि इन्ही के कारण पृथ्वी पर जल आया। ये बर्फ से ढके होते हैं। सूर्य के नजदीक पहुंचने पर बर्फ वाष्पित होकर लंबी पूंछ का रूप धारण कर लेती है, जो लाखों किमी लंबी हो सकती है।

ऐसा कोई वर्ष नही, जब कोई कोई कॉमेट हमारे करीब न आता हो। भले ही धार्मिक लिहाज से इन्हे शुभ न माना जाता हो, लेकिन खगोलीय घटना के लिहाज से दिलचस्प माना जाता है।

हैली धूमकेतु एक लघु-अवधि धूमकेतु के रूप में बेहतर जाना जाता है। यह प्रत्येक 75 से 76 वर्ष के अंतराल में पृथ्वी से नजर आता है। हैली ही एक मात्र धूमकेतु है जिसे पृथ्वी से नग्न आँखों से साफ़-साफ़ देखा जा सकता है और यह नग्न आँखों से देखे जाने वाला एक मात्र धूमकेतु है जो मानव जीवन में अधिकांश दो बार दिखाई देता है। नग्न आँखों से दिखाई देने वाले अन्य धूमकेतु चमकदार और अधिक दर्शनीय हो सकते है लेकिन वह हजारों वर्षों में केवल एक बार दिखाई देते है।

श्रोत व फोटो: स्पेस. कॉम

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